संज्ञा परिभाषा भेद व् पूरी जानकारी noun definition distinction and complete information

संज्ञा noun परिभाषा भेद व् पूरी जानकारी

संज्ञा [noun] परिभाषा

संज्ञा [noun] का शाब्दिक अर्थ है – ‘ सम् + ज्ञा ‘ अर्थात् सम्यक् ज्ञान करानेवाला ; अत : किसी भी वस्तु , व्यक्ति , स्थान , वर्ग , भाव , स्थिति आदि का परिचय करानेवाले शब्द को संज्ञा[noun] कहते हैं ।

संज्ञा का पर्याय है – नाम । किसी व्यक्ति ( प्राणी ) , वस्तु , स्थान , स्थिति , वर्ग , भाव , विचार के नाम को संज्ञा कहा जाता है ;

  • जैसे  श्याम ( व्यक्ति ) के पिता ( संबंध का नाम ) जयपुर ( शहर ) में निवास करते हैं ।
  • गाय ( प्राणी ) एक उपयोगी पशु ( वर्ग ) है ।
  • बुढ़ापा ( विचार ) जीवन ( विचार ) का निष्कर्ष ( विचार ) है ।

संज्ञा [noun] के भेद

व्यक्ति , गुण , वस्तु , भाव , स्थान आदि के आधार पर noun के तीन भेद माने गए हैं। 

  • 1. व्यक्तिवाचक संज्ञा [noun]—

जो शब्द किसी व्यक्ति विशेष , स्थान विशेष या वस्तु विशेष का बोध कराते हैं , उन्हें व्यक्तिवाचक संज्ञा [noun] कहते हैं ; जैसे- गौतम बुद्ध , हिमालय , ताजमहल , सीता , गंगा , जयपुर , रामायण आदि ।

व्यक्तिवाचक संज्ञा की विशेषता यह है कि

( 1 ) यह दुनिया में एक ही होती है

[2] इसको हम पहले से जानने के आधार पर ही पहचान सकते हैं । गंगा / ताजमहल / रामायण को यदि हमने पहले से देखा है , समझा है तभी हम पहचान सकते हैं कि यह नदी तो गंगा है , यह भवन ताजमहल है , यह पुस्तक रामायण है ; अचानक पहली बार देखने से नहीं ।

  • 2. जातिवाचक संज्ञा—

जो शब्द किसी प्राणी , पदार्थ या समुदाय की पूरी जाति वर्ग- ( Class ) का बोध कराता है , उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं ; जैसे- लड़का , पर्वत , पुस्तक , घर , नगर , झरना , कुत्ता आदि ।

 जातिवाचक संज्ञा तो एक वर्ग है और दुनिया में उसकी इकाइयाँ अनेक होती है । लड़का जातिवाचक संज्ञा है और दुनिया में लड़का वर्ग के अनेक लड़के विद्यमान हैं । जातिवाचक का आधार है – वस्तु आदि का समान गुण और पहले से उन वर्ग गुणों का ज्ञान । वैसे ही गुण अन्य किसी में पहचान कर नई वस्तु / प्राणी को भी हम तुरंत पहचान लेते हैं । नए कुले , लड़के , पहाड़ , फूल में वे गुण देखने पर उसे पहचान लेते हैं और वैसा ही कह भी हाने से देखे हुए कुत्तो , लड़कों , पहाड़ों , फूलों आदि के समान गुणों के आधार पर किसी भी है । यह उस व्यक्ति / वस्तु की जाति , समूह , वर्ग के गुणों / विशेषताओं की जानकारी के आधार पर होता है । ऐसा हम किसी नई , व्यक्तिवाचक संज्ञा को नहीं पहचान सकते ।

पहले देखे गए लड़कों के आधार पर अपरिचित किसी नए लड़के को हम ‘ लडका के रूप में पहचान सकते हैं किंतु पहले देखे गए ‘ नरेश ‘ नामक व्यक्ति के आधार पर किसी दूसरे लड़के माया को सुरेश ‘ के रूप में नहीं पहचान सकते जब तक कि हमें कोई सुरेश ‘ को सुरेश प में परिचित ही न कराए । ऊपर लिखे विवेचन को भली प्रकार से समझ लेने पर हम व्यक्तिवाचक और जातिवाचक संज्ञा में भेद कर सकते हैं ।

निचे लिखे शब्दों को व्यक्तिवाचक और जातिवाचक संज्ञा के रूप में छाँटिए

ब्रहमपुत्र , पत्थर , संगमरमर , ग्रेनाइट , फूल , कमल , हिमालय , अनाज , गेहूँ , कल्याणसोना गेही , गाय , जर्सी गाय , फल , आम , लँगड़ा आम । ऊपर के शब्दों में केवल ब्रह्मपुत्र और हिमालय व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ हैं शेष सभी जातिवाचक हैं ।

दुनिया में व्यक्तिवाचक संज्ञा केवल एक होती है और जातिवाचक- अनेक । जातिवाचक को उसके गुणों को देखकर पहचान सकते हैं । हम पत्थर , संगमरमर , ग्रेनाइट को ( उनके गुणों के आधार पर ) देखकर पहचान सकते हैं ; पत्थर , संगमरमर , ग्रेनाइट दुनिया में हैं भी अनेक । पत्थर जातिवाचक है तो संगमरमर और ग्रेनाइट भी जातिवाचक ही हैं क्योंकि वे पत्थर की ही उपजाति ( Sub – class ) हैं , लेकिन हैं तो जाति ही ।

अनाज जातिवाचक है तो गेहँ अनाज की उपजाति है और कल्याणसोना गेहँ उपजाति की भी उपजाति है लेकिन ये जातिवाचक संज्ञाएँ ही हैं , व्यक्तिवाचक नहीं । इसी प्रकार गाय तो जातिवाचक है ही , जर्सी गाय भी गाय की उपजाति ही है और गुणों के आधार पर हम जिस प्रकार गाय को पहचान लेते हैं उसी प्रकार विशिष्ट गुणों के आधार पर जर्सी गाय को भी पहचान लेते हैं ।जर्सी गायें इस दुनिया में अनेक हैं , इसलिए जर्सी गाय भी जातिवाचक संज्ञा ही है । यही स्थिति संगमरमर , ग्रेनाइट , कल्याणसोना गेहूँ की है ; ये दुनिया में अनेक हैं और गुणों के आधार पर हम इनकी पहचान कर लेते हैं ।

अंग्रेजी व्याकरण के आधार पर जातिवाचक संज्ञा के अंतर्गत द्रव्यवाचक व समूहवाचक संज्ञाओं में विभाजित कर लेते हैं किंतु ऐसा वर्गीकरण हिंदी भाषा के व्याकरण में अनावश्यक है । दरअसल अंग्रेजी व्याकरण में द्रव्यवाचक और समूहवाचक संज्ञाओं का वर्गीकरण Arical – a , an , the के लगाने की दृष्टि से आवश्यक है किंतु हिंदी में Artical की अवधारणा न होने के कारण इस विभाजन की आवश्यकता ही नहीं है । फिर भी परीक्षाओं में विद्यार्थी – हित को ध्यान में रखकर इनका विभाजन इस प्रकार किया जा सकता है

( क ) द्रव्यवाचक – किसी पदार्थ या द्रव्य ( द्रव यानी बहनेवाली वस्तु – पानी , तेल आदि द्रव्य यानी पदार्थ , जैसे – मिट्टी , चीनी , तेल आदि ) का बोध करानेवाले शब्दों को द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं , जैसे – लोहा , सोना , घी , मिट्टी , तेल , दूध , लकड़ी , ऊन आदि ।

 इन संज्ञाओं को हम गिन नहीं सकते । दो लोहा , चार सोना आदि नहीं कह सकते है अगणनीय संज्ञाएँ हैं और ये मात्रात्मक या परिमाणात्मक हैं । इनमें से कुछ के बहुवचन बनने हैं , जैसे- मिट्टी – मिटियाँ , लकड़ी – लकड़ियाँ आदि ।

( ख ) समूहवाचक– ये संज्ञाएँ अनेक गणनीय संज्ञाओं के समूह से बनती हैं , और ये एकवचन एवं बहुवचन दोनों रूपों में ( सेना / सेनाएँ , कक्षा / कक्षाएँ ) प्रयुक्त हो सकती हैं । ये शब्द किसी व्यक्ति के वाचक न होकर समूह या समुदाय के वाचक होते हैं ; जैसे – सेना , कक्षा , मंडली , जुलूस , परिवार , पुस्तकालय आदि । व्यक्तिवाचक संज्ञा [noun] का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग- जब कोई व्यक्तिवाचक संज्ञा व्यक्ति विशेष का बोध न कराकर उसी व्यक्ति – जैसे गुणों या दोषों से युक्त अनेक व्यक्तियों के वर्ग ( जाति ) का बोध कराती है , तब वह व्यक्तिवाचक संज्ञा न रहकर जातिवाचक संज्ञा बन जाती है , जैसे

( i ) इन रावणों से बचो

( ii ) नेता जी के बलिदान से धरती पर अनेक सुभाष पैदा हो गए ।

( iii ) वह बिल्कुल हरिश्चंद्र है ।

उपर्युक्त वाक्यों में – ‘ रावण ‘ , ‘ सुभाष ‘ और ‘ हरिश्चंद्र ‘ क्रमशः अधर्मियों , क्रांतिकारियों व सत्यवादियों के वर्ग के लिए प्रयुक्त हुए हैं इसलिए ये जातिवाचक संज्ञा [noun] बन गए हैं ।

जातिवाचक संज्ञा [noun] का व्यक्तिवाचक के रूप में प्रयोग- जब कोई जातिवाचक संज्ञा संपूर्ण जाति का बोध न कराकर किसी व्यक्ति विशेष का बोध कराए तो वह जातिवाचक न रहकर व्यक्तिवाचक संज्ञा बन जाती है । जैसे

( i ) गाँधी जी राष्ट्रपिता कहलाए । ( गाँधी अनेक व्यक्तियों की जाति का नाम हैं किंतु यहाँ पर केवल ‘ महात्मा गाँधी ‘ व्यक्ति विशेष से आशय है । )

( ii ) पंडित जी आधुनिक भारत के निर्माता थे ।

( iii) नेता जी ने आज़ाद हिंद फौज का गठन किया । इन वाक्यों में ‘ गाँधी जी ‘ , ‘ पंडित जी ‘ , ‘ नेता जी ‘ – किसी जाति विशेष के लिए प्रयुक्त न होकर क्रमश : महात्मा गाँधी , जवाहरलाल नेहरू , सुभाषचंद्र बोस व्यक्ति विशेष के लिए प्रयुक्त हुए हैं ।

  •  3. भाववाचक संज्ञा –

जिन शब्दों से व्यक्तियों / पदार्थों के धर्म ( Nature ) , गुण , दोष , अवस्था ( State ) , व्यापार ( Activity ) , भाव , स्वभाव या अवधारणा ( Concept ) , विचार आदि का बोध होता है ; वे भाववाचक संज्ञाएँ कहलाती हैं ; जैसे-कोमलता , बचपन , लंबाई , बुढ़ापा , शत्रुता , सलाह , मातृत्व , औचित्य , दासता  , मित्रता  आदि ।

भाववाचक संज्ञा का बहुवचन – जातिवाचक संज्ञा [noun] की तरह भाववाचक संज्ञा का भी बहुवचन बनता है , जैसे— बुराई – बुराइयाँ , दूर – दूरियाँ , प्रार्थना – प्रार्थनाएँ ; किंतु ये शब्द भाववाचक संज्ञा के बहुवचन रूप ही हैं । कुछ लेखकों ने व्यक्तिवाचक संज्ञा के बहवचन रूपों ( रावणों , जयचंदों , विभीषणों ) को जातिवाचक मान लेने की तरह ( जोकि सही है ) भाववाचक संज्ञाओं के बहुवचनों ( बुराइयाँ , दूरियाँ , प्रार्थनाएँ ) को भी जातिवाचक संज्ञा [noun] मान लिया है जोकि गलत है । जैसे— जातिवाचक संज्ञा के बहुवचन बनते हैं ( लड़का – लड़के , सड़क – सड़कें ) उसी तरह भाववाचक संज्ञा [noun] के भी बहवचन बनते हैं-

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एक प्रार्थना , दो प्रार्थनाएँ , एक बुराई – दस बुराइयाँ । यहाँ दस बुराइयो , बुराइयों का समूह नहीं है बल्कि दस अलग – अलग प्रकार की बुराइयाँ हैं । हवाई यात्रा शुरू होने से जयपुर से उदयपुर और जैसलमेर की दरियाँ कम हो गई हैं । इस वाक्य में जयपुर – उदयपुर और जयपुर – जैसलमेर की दो अलग – अलग किलोमीटर की दो अलग – अलग दुरियों का संकेत है , कई दूरियों को मिलाकर दूरियों का एक वर्ग बना लेने का अवगहा है । विमल की तीन शिकायतें ( 1 + 1 + 1 ) तो दूर हो गईं लेकिन अभी दो शिकायतों का ही बोध होता है जैसेकि ‘ पाँच लड़के खड़े हैं ‘ वाक्य में पाँच अलग – अलग लड़के खड़े . भाववाचक संज्ञाएँ पाँच प्रकार के शब्दों से बनती हैं

1. जातिवाचक संज्ञा noun से- ( विभिन्न तद्धित प्रत्यय लगकर ) – लड़का – लड़कपन , भित्र – मित्रता , पशु – पशुता , आदमी – आदमीयत , चिकित्सक – चिकित्सा , चोर – चोरी , तरुण – तरुणाई ,

2.सर्वनाम से ( विभिन्न तद्धित प्रत्यय लगकर ) – निज – निजत्व , अपना – अपनापन , सर्व – सर्वस्व , अहम् – अहंकार , मम् – ममता , ममत्व  आदि ।

3. विशेषण से ( विभिन्न तद्धित प्रत्यय लगकर ) – बूढा – बुढ़ापा , चतुर – चतुरता / चतुराई , मोठा – मिठास  , मधुर – मधुरता / माधुर्य , खट्टा – खटास / खट्टापन , अरुण – अरुणिमा , कंजूस – कंजूसी , उचित – औचित्य , लघु – लघुता , आलसी – आलस्य , विद्वान विद्वता  , गरीब – गरीबी , भूखा – भूख , परिष्कृत – परिष्कार , धीर – धैर्य / धीरज आदि ।

4. क्रिया से संज्ञा [noun]- ( विभिन्न कृत् प्रत्यय लगकर ) – चढ़ना – चढ़ाई , चलना – चाल , दौड़ना – दौड़ , सजाना – सजावट , उतारना – उतार , कमाना – कमाई , गाना – गान , जीना – जीवन , झुकना झुकाव , खेलना – खेल , थकना – थकान , पहुँचना – पहुँच , जीतना – जीत , मिलाना – मिलावट , हँसना हंसी , पीना – पान आदि ।

5. अव्यय से– निकट – निकटता , दूर – दूरी , नीचे – नीचता , ऊपर – ऊपरी , धिक् – धिक्कार आदि । इस प्रकाराता , त्व , पन , ई , आई , आ , इयत , आहट , त , य आदि प्रत्यय लगाने से अन्य शब्द भाववाचक संज्ञाओं में परिवर्तित हो जाते हैं । हिंदी में संज्ञाएँ लिंग , वचन तथा कारक द्वारा अपना रूप निर्धारण करती हैं । ये संज्ञा [noun] के विकारक तत्त्व कहलाते हैं ।

विशेषण का संज्ञा[noun] के रूप में प्रयोग

हिंदी में विशेषण शब्द का संज्ञा [noun] के रूप में भी प्रयोग होता है ; जैसे 1. गरीब लड़के पढ़ नहीं सकते । ( यहाँ ‘ गरीब ‘ शब्द ‘ लड़के ‘ संज्ञा का विशेषण है । ) 2. गरीब ( लोग ) पढ़ नहीं सकते , अमीर ( लोग ) पढ़ना नहीं चाहते । यहाँ गरीब विशेषण गरीब लोगजा के स्थान पर तथा अमीर विशेषण ‘ अमीर लोग संज्ञा के लिए प्रयुक्त हुआ है इसलिए इन विशेषणों की भूमिका संज्ञा की होने के कारण इन पदों को संज्ञापद ही समझना चाहिए ।

 अन्य प्रयोग

1. ईमानदारों ( ईमानदार लोगों ) को डरने की ज़रूरत नहीं ।

2. बड़ों ( बड़े लोगों ) को छोटों ( छोट ) का ध्यान रखना चाहिए ।

3. भूखों ( भूखे लोगों ) को खाना खिलाओ ।

यहाँ ‘ ईमानदारों ‘ , ‘ बड़ों ‘ और ‘ भूखों ‘ शब्द विशेषण से जातिवाचक संज्ञा [noun] बने हुए हैं । व्यक्तिवाचक , जातिवाचक एवं भाववाचक संज्ञा की पहचान- जिस संज्ञा noun( व्यक्ति या वस्तु ) को हम देख – सुन – स्पर्श कर सकते हैं ; जो भौतिक आकार लिए हुए है चाहे वह भौतिक आकार सूक्ष्म ( हवा , अमीबा ) हो , चाहे स्थूल ( लाल किला , कमरा , सड़क ) व्यक्तिवाचक या जातिवाचक होती हैं किंतु यदि हम किसी को इंद्रियों से भौतिक रूप में देख – सुन – स्पर्श – चख नहीं सकते , केवल अपने मन में विचार या अनुभूति के रूप में महसूस कर सकते हैं तो वह भाववाचक संज्ञा होती है ।

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