500+ मुहावरे व लोकोक्तियाँ हिंदी में

मुहावरे व लोकोक्तियाँ हिंदी में

मुहावरे क्या है मुहावरों का मतलब क्या होता है।

मुहावरों का शाब्दिक अर्थ है अभ्यास

कभी कभी निरंतर प्रयोग और अभ्यास से कोई कथन या उक्ति अपना शाब्दिक अर्थ छोड़कर किसी विशेष अर्थ का बोध करने लगाती है ,तब उसे मुहावरे कहते है।

जब कोई वाक्यांश अपने सामान्य  शाब्दिक अर्थ को छोड़ कर विशेष शाब्दिक अर्थ में रूढ़ हो जाता है ,तो उसे मुहावरा  कहा जाता है।  

उदाहरण के लिए निचे दिए गए लिखित अंशो पर ध्यान दीजिये

क  ख 
उसने जलती आग में घी डाल दिया पिताजी पहले से क्रोधित थे ,राजू द्वारा नया टीवी ख़राब कर दिया जाने की बात ने  आग में घी का काम किया 
अचानक शोर सुन कर राजू की आंख खुल गयी  जब दिनु जुए में सब कुछ हार गया तो उसकी आंख खुली 
उसने दो रस्सियों में गांठ बांधकर उन्हें जोड़ दिया बड़ो की यह बात गांठ बांधलो –सच्चा मित्र वही होता है जो विपत्ति में काम आये
छोटे बच्चों को उनकी नानी बहुत याद आती है पुलिस ने चोरों की ऐसी पिटाई की की उन्हें उनकी नानी याद आगयी 
आँखों में दर्द होने के कारण उसने डॉक्टर को अपनी आंखे दिखाई एक तो नया टीवी ख़राब कर दिया ऊपर से आंखे दिखाते हो
उसने अपने दोस्त को इमली खिला कर उसके दांत खट्टे कर दिए कारगिल के युद्ध में भारतीय सैनिको ने दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए 

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 मुहावरो  के सम्बन्ध में ध्यान रखने योग्य  बात

सभी वाक्यांश मुहावरे नहीं होते , पर सभी मुहावरे वाक्यांश होते हैं ।

सभी मुहावरे किसी विशेष अर्थ में रुढ  हो जाते हैं ।

महावरों को निश्चित पदावली होती है जिसमें परिवर्तन नहीं किया जा सकता । जैसे – ‘ अंग – अंग  मुसकराना’- मुहावरे की जगह ‘ अंग – अंग प्रसन्न होना ‘ – प्रयोग अशुद्ध है । – मुहावरे का प्रयोग वाक्य के प्रारंभ , मध्य या अंत में कहीं भी किया जा सकता है ।

मुहावरों और लोकोक्तियों में अंतर

मुहावरे और लोकोक्ति में निम्नलिखित अंतर है

1. मुहावरे का प्रयोग वाक्य के प्रारंभ में , मध्य में या अंत में कहीं भी किया जा सकता है , पर लोकोक्ति का प्रयोग वाक्य  के अंत में स्वतंत्र या पूर्ण इकाई के में होता है ।

2. मुहावरा वाक्य का अंग बन जाता है , पर लोकोक्ति पूर्ण वाक्य होती है ।

3. पूर्ण इकाई होने के कारण लोकोक्ति में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता , जबकि मुहावरे मैं वाक्य के अनुसार  परिवर्तन किया जाता है ।

जैसे . ‘ अंगूठा दिखाना ‘ एक मुहावरा है । इसका प्रयोग देखिए । सेठ जी ने मुझे पाँच सौ रुपए देने का वायदा किया था पर ऐन वक्त पर उन्होंने मुझे अंगूठा दिखा दिया । ( ‘ अंगूठा दिखाना ‘ – मुहावरा वाक्य के अनुसार ‘ अँगूठा दिखा दिया में बदल गया ।

● ‘ एक अनार सौ बीमार’- एक लोकोक्ति है । इसका प्रयोग देखिए इस कार्यालय में लिपिक के दो स्थान रिक्त हैं , जिनके लिए आठ सौ आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं । इसे कहते हैं- एक अनार सो बीमार । ( एक अनार सौ बीमार ‘ – लोकोक्ति वाक्य के अंत में अपने वास्तविक रूप में ही प्रयुक्त हुई है । )

आगे परीक्षोपयोगी मुहावरे , उनके अर्थ एवं वाक्य – प्रयोग दिए गए हैं । उन्हें ध्यान से पढ़िए और उनका अभ्यास कीजिए

[ अ ]

1. अंगारे उगलना – अत्यधिक क्रोध प्रकट करना । अहंकारी रावण विभीषण की बात सुनकर अंगारे उगलने लगा ।

2. अंगारे बरसना- भीषण गरमी पड़ना । राजस्थान में मई – जून के महीने में अंगारे बरसते हैं ।

3. अक्ल पर पत्थर पड़ना- बुद्धि नष्ट होना । दुर्योधन की बातों में आने के कारण कर्ण की अक्ल पर भी पत्थर पड़ गए ।

4. अंधे की लाठी – एकमात्र सहारा । पिता की असमय मृत्यु के बाद अब तो उसका इकलौता बेटा राजू ही अपनी विधवा माँ के लिए अंधे की लाठी की तरह है ।

5. अंग – अंग मुसकराना- अत्यधिक प्रसन्न होना । पिताजी के चुनाव में भारी मतों से जीतने का समाचार सुनकर मेरा अंग – अंग मुसकरा रहा है ।

6. अपना उल्लू सीधा करना – अपना मतलब पूरा करना । दूसरों को चाहे कितना ही नुकसान उठाना पड़े , पर उसे तो अपना उल्लू सीधा करने में ही आनंद आता है ।

7. अंग – अंग ढीला होना – बहुत थक जाना । पर्वतीय क्षेत्र में कहीं – कहीं चढ़ाई इतनी अधिक होती है कि चढ़ते – चढ़ते यात्रियों के अंग – अंग ढीले हो जाते हैं । गाई । क

8.अंगूठा दिखाना – साफ़ इन्कार कर देना । रमेश ने मुझे सहायता देने का आश्वासन दिया था , पर ऐन वक्त पर उसने मुझे अँगूठा दिखा दिया ।

9. अंधे के आगे रोना – निर्दय व्यक्ति के समक्ष दुःख प्रकट करना । कंजूस करोड़ीमल के सामने सहायता के लिए गिड़गिड़ाना तो अंधे के आगे रोने के समान है ।

10. अंधे के हाथ बटेर लगना- किसी अयोग्य व्यक्ति को आशा के विपरीत मूल्यवान वस्तु का मिल जाना । इस मैट्रिक पास रोहन को एम . ए . पास बीवी मिल गई , सचमुच ही अंधे के हाथ बटेर लग गई ।

11. अंधों में काना राजा – मूों में थोड़ा समझदार । पहले गाँव में पटवारी ही पढ़ा – लिखा होता था , इसलिए लोग उसे ही बुद्धिमान समझते थे और वही अंधों में काला राग समझा जाता था ।

12. अक्ल के घोड़े दौड़ाना- बहुत सोच – विचार करना । देश के तमाम नेता और बुद्धिजीवी कश्मीर समस्या पर अक्ल के घोड़े दौड़ा रहे हैं , पर समाधान की किरण दूर – दूरदक दिखाई नहीं दे रही है ।

13. अपने मुँह मियाँ मिठू बनना- अपनी प्रशंसा स्वयं करना । – अगर दूसरे तुम्हारी तारीफ़ करें तो और बात है , तुम तो हर समय अपने मुँह मियाँ मिठू बनते रहते हो ।

14 , अपना ही राग अलापना – अपनी ही बात कहना । लगता है तुम्हें दूसरों के सुख – दुःख से कुछ लेना – देना नहीं , क्योंकि तुम्हें तो अपना ही राग अलापने की लत पड़ गई है ।

15. अपनी खिचड़ी अलग पकाना- सबसे अलग रहना । . आजकल विवाह होते ही हर दंपती अपनी खिचड़ी अलग पकाना चाहता है ।

16. अपना – सा मुँह लेकर रह जाना- लज्जित हो जाना । सरपंच की सिफारिश पर भी जब थानेदार ने धरम के अपराधों पुत्र को नहीं छोड़ा , तो वह अपना – सा मुँह लेकर रह

[ आ ]

17. आँखों का तारा- अत्यंत प्यारा । हर बेटा अपने मां  – बाप की आँखों का तारा होता है ।

18. आँखें चार होना- प्यार होना । जब लड़के और लड़की की आँखें चार होती हैं , तो उनमें एक – दूसरे से मिलने की तड़प जाग जाती है ।

19. आँखों में धूल झोंकना- धोखा देना । सुभाषचंद्र बोस पहरेदारों की आँखों में धूल झोंककर देश से बाहर जाने में सफल हो गए ।

20. आँखें खुलना – होश में आना । मैं तो व्यर्थ ही उस पर भरोसा करता था , आज उसके हाथों धोखा खाकर मेरी आँखें खुल गईं ।

21. आँखें दिखाना- इशारे से धमकाना । मैं तुमसे डरने वाला नहीं हूँ फिर मुझे क्यों आँखें दिखा रहे हो ?

22. आँख रखना- ध्यान रखना । आजकल तुम्हारा नौकर ज्यादा हेरा – फेरी करने लगा है । अब तो तुम्हें उस पर आँख रखनी ही पड़ेगी ।

23. आँखें बिछाना – प्रेमपूर्वक स्वागत करना । कुँवर जी के महल में प्रवेश करते ही दास – दासियों ने आँखें विछा दीं ।

24. आँच न आने देना- हानि न होने देना । तुम विरोधियों की चिंता किए बिना निष्ठापूर्वक कार्य करते रहो।मैं तुम पर जरा भी आँच न आने दूंगा । ०

25.आस्तीन का साँप – धोखेबाजा आजकल वो अक्सर यही देखने में आ रहा है कि जिसे हम मित्र समझते हैं वह आस्तीन का सांप  निकलता है ।

26. आकाश से बातें करना – बहुत ऊँचा होना । हिमालय को चोटियां आकाश से बातें करती है ।

27. आकाश – पाताल का अंतर – बहुत अंतर होना । सुनील और मोहन यद्यपि सगे भाई हैं . पर उन दोनों के स्वभाव और व्यवहार में आकाश – पाताल का अंतर है ।

28. आकाश – पाताल एक करना- बहुत प्रयल करना । सेठ बनवारी लाल ने अपने अपहृत पुत्र को तलाशने में आकाश – पाताल एक कर दिया , पर उसका कोई सुराग नहीं क मिला ।

29. आटे में नमक- बहुत कम संख्या में होता । यद्यपि विश्व में आतंकवादियों की संख्या आटे में नमक के बराबर ही है , पर वे विश्वशांति के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं ।

30. आटे – दाल का भाव मालूम होना- कठिनाई का अनुभव होगा । अभी तो तुम बच्चे हो , खूब गुलछर्रे उड़ा लो , पर याद रखो कि गृहस्थी का भार सिर पर पड़ते ही आटे – दाल का भाव मालूम हो जाएगा ।

31. आसमान सिर पर उठाना – बहुत शोर मचाना । अध्यापक के कक्षा से बाहर निकलते ही बच्चों ने आसमान सिर पर उठा लिया ।

[ ई ]

32. ईद का चाँद होना- बहुत दिनों बाद मिलना या दिखाई देना । जब से तुम्हारा विवाह हुआ है , तुम्हारे दर्शन ही दुर्लभ हो गए हैं । भाई . तुम तो ईद के चाँद हो गए हो ।

33. ईंट का जवाब पत्थर से देना- दुष्टता का जवाब दुगुनी दुष्टता से देना । यदि पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण किया , तो भारत उसकी हर ईंट का जवाब पत्थर से देगा । * 34 . ईंट से ईंट बजाना- सब कुछ नष्ट – भ्रष्ट कर देना । तीन बार युद्ध में हारने के बाद यदि इस बार पाकिस्तान ने हम पर आक्रमण करने का दुस्साहस किया , तो उसको ईट से ईंट बजा देंगे ।

[ उ ]

35. उँगली पकड़कर पहुँचा पकड़ना- थोड़ा सहारा पाकर सब पर अधिकार कर लेना । अंग्रेज़ भारत में व्यापार के लिए आए थे , पर बन गए देश के शासक । यह तो ऊँगली पकड़कर पहुँचा एकड़ने वाली बात हो गई ।

36. उँगली पर नचाना – वश में रखना । वह भ्रष्ट अधिकारी ईमानदारी कर्मचारियों को उँगली पर नचाने की कोशिश में नाकाम रहा ।

37. उल्टी गंगा बहाना – विपरीत कार्य करना । उसने भरी सभा में तुम्हारे पिताजी का अपमान किया और तुम उसे ही मंच पर सम्मानित कर रहे हो । क्या यह उल्टी गंगा बहाना नहीं है ?

38. उधेड़ – बुन में पड़ना- सोच – विचार में पड़ना । अरे भाई ! क्यों उधेड़ – बुन में पड़े हो ? घर के चारों ओर चक्कर लगाने वाले इस मजनूं मियाँ को पुलिस के हवाले करके मुक्ति पाओ ।

39. उड़ती चिड़िया पहचानना- मन की बात जान लेना । इस पुलिस इंस्पेक्टर की नज़र से कोई अपराधी बच ही नहीं सकता , क्योंकि यह तो उड़ती चिड़िया पहचान लेता है ।

40.ऊंट के मुँह में जीरा- आवश्यकता से कम भोजन । इस पहलवान के लिए नाश्ते में दो सेव और एक पाव दूध देना ऊँट के मुंह में जीरे के समान है ।

[ ए ]

41. एकही लकड़ी से हाँकना – एक – सा व्यवहार करना । अरे साहच ! कर्मठ और अकर्मण्य कर्मचारियों में कुछ तो अंतर करी । सबको एक ही लकड़ी से मत हाँको ।

42. एड़ी – चोटी का जोर लगाना– बहुत परिश्रम करना । तुम चाहे एड़ी – चोटी तक का जोर लगा लो , पर पढ़ाई में मुझसे आगे नहीं निकल सकते ।

43. एक ही धैली के चट्टे – बट्टे होना- सभी का एक जैसा होना । आज के जमाने में अधिकारी हो या कर्मचारी – सभी भ्रष्ट हैं । सबके सब एक ही थैली के चट्टे – बट्टे हैं ।

[ क ]

44. कमर कसना – तैयार होना । अध्यापक ने कहा – बच्चो ! परीक्षा सिर पर आ गई है । अब कमर कस लो ।

45.कमर टूटना – व्यवसाय में जब लगातार घाटा होने लगता है , तो व्यवसायी की कमर ही टूट जाती है ।

46. कदम चूमना – खुशामद करना । चाहे मुझे बेरोजगार ही क्यों न रहना पड़े , पर नौकरी पाने के लिए मैं किसी के कदम नहीं चूमूंगा ।

47. कलेजा मुँह कोआना- हृदय का दुःख उमड़ना । सरदार भगतसिंह जैसे देशभक्त को कितनी निर्दयता से अंग्रेजों ने फाँसी पर चढ़ाया , यह सोचकर मेरा कलेजा मुँह को आ जाता है ।

48. कलेजा छलनी होना- बहुत दुखी होना । तुम्हारी खरी – खोटी बातें सुनकर मेरा कलेजा छलनी हो गया है ।

49. कलेजा ठंडा होना – संतोष होना । अपने भाई के हत्यारों को फाँसी के दे पर लटकवाने के बाद ही मेरा कलेजा ठंडा होगा ।

50. कलेजे पर साँप लोटना – ई . से जलना । भारत की प्रगति को देखकर कुछ देशों के कलेजे पर साँप लोटने लगा है ।

51. कलेजे पर पत्थर रखना- धैर्य रखना । युद्ध में अपने पुत्र की मृत्युको उसने कलेजे पर पत्थर रख कर सहा ।

52. कलेजा निकालकर रख देना- सब कुछ अर्पित कर देना । सैनिकों ने प्रण किया कि वे अपने देश की रक्षा के लिए अपना कलेजा भी निकालकर रख देने को तैयार हैं । 53. कच्ची गोलियाँ खेलना- अनुभव की कमी । मैंने कोई कच्ची गोलियों नहीं खेली हैं , अपने शत्रुओं को ऐसा मजा चखाऊँगा कि जीवन भर याद रखेंगे ।

54. कलई खुलना – भेद खुलना । अपराधी चाहे कितनी ही सावधानी क्यों नबरते , परंतु एक न एक दिन उसके दुष्कर्मों की कलई खुल ही जाती है ।

55. कठपुतली होना – किसी के वश में होना । हमें किसी के हाथ कठपुतली होने की बजाय स्वतंत्र और आत्मनिर्भर होना चाहिए ।

56. कंधे से कंधा लगाना- सहायता करना । अगर हम प्रगति चाहते हैं , तो हमें हरेक के कंधे से कंधालगाना होगा ।

57. कपोल कल्पित – मनगढंत  । चोर ने पुलिस के अधिकारी को अपनी कपोल कल्पित कथाओं से चकमा देने की कोशिश की ।

58 , कतरब्योंत करना – काट – छाँट करना , वचत करना । चाहे किसी की कितनई ही आमदनी क्यों न हो , पर इस महंगाई के दौर में हर एक को अपने खर्च में क़तर ब्योत करना पड़ रहा है । 

59. कलेजा धामकर रह जाना- जी कड़ा करके धीरज रखना  । कारगिल युद्ध के दौरान जिन माताओं के लाल वीरगति को प्राप्त हुए , वे कलेजा थामकर रह गई ।

60. कान में पैर लटकना – मृत्यु के समीप होना । जरा इस बूढ़े को देखो तो सही । पैर कब्र में लटके हुए हैं , पर नई शादी के सपने देख  रहा है ।

61.कंचन बरसना – बहुत धनवान होना । सेठ अमीरचंद की अमीरी का क्या कहना ! उसके यहाँ तो रोज कंचन बरसता है ।

62. कान भरना – चुगली करना । तुम्हें अपने काम से काम रखना चाहिए । अफसरों के कान भरना अच्छी आदत नहीं है ।

63. कानों में तेल डालना- जानबूझ कर भी चुप रह जाना । उग्रवादियों ने जम्मू कश्मीर के नागरिकों का जीना हराम कर दिया है , पर राजकर्ताओं ने अपने कानों में तेल डाल रखा है ।

64. कान कतरना – बहुत अधिक चालाक होना । यह नौकरानी तो इतनी चतुर है कि बड़ों – बड़ों के कान  कतरती रहती है ।

65. कान पर जूं तक न रेंगना- असर न होना । मैंने बेटे को बहुत समझाया कि बुरे मित्रों की संगति छोड़ दो , पर उसके कान पर जूं तक नहीं रेंगी ।

66. कान पकड़ना- अपनी गलती को स्वीकार करना । सुरेश ने पिताजी के समक्ष कान पकड़ते हुए यह कहा कि भविष्य में वह कभी चोरी नहीं करेगा ।

67. कान काटना- बहुत चालाक होना । इस छोटे – से बालक की चतुरता तो देखो । इसी उम्र में यह बड़े – बड़े विद्वानों के कान काट रहा है ।

68. कान खड़े होना – सतर्क होना । उस साधु वेशधारी के बारे में जब मुझे पता चला कि वह आई.एस.आई का एजेंट है , तो मेरे कान खड़े हो गए ।

69. कानाफूसी करना- चुपचाप बातें करना । जहाँ दो दुष्ट व्यक्ति पहुँच जाते हैं , किसी न किसी विषय पर उनमें कानाफूसी शुरू हो जाती है ।

70. काला , नाग – दुष्ट प्रकृति वाला । पाकिस्तान काला नाग है , भारत को एक न एक दिन उसका फन कुचलना ही होगा !

71. कालिख पोतना- बदनाम करना । . कुपत्र अपने वंश के यशस्वी चेहरे पर अपने बुरे आचरण की कालिख पोत देता है ।

72. कागज की नांव – अस्थायी साधन । भ्रष्टाचार यदि कागज की नाव है तो भ्रष्टाचारी उस पर सवार यात्री ।

73. काया पलट जाना – बहुत बड़ा परिवर्तन हो जाना । आज़ादी के बाद देश में कल – कारखानों की बाढ़ – सी आ गई जिससे समृद्धि बढ़ी , अभाव गिटे और आज तो देश की काया ही पलट हो गई है ।

74. काठ का उल्लू – निरा मूर्ख । इस समस्या पर तुम उससे क्या सलाह लोगे ? वह तो काठ का उल्लू है ।

75. कागजी घोड़े दौड़ाना- केवल योजना बनाना । कागजी घोड़े दौड़ाने से कोई समस्या हल नहीं हो सकती ।उसे हल करने के लिए रचनात्मक कार्य जरूरी है ।

76.काफूर होना – गायब होना । अरे  यह दवा लेते ही मेरा सिरदर्द तो काफूर हो गया ।

77.काम तमाम करना – मार देना । फिरोती की रकम  न मिलने पर गुंडों ने सेठ  जी का काम तमाम कर दिया ।

78. काम आना – मारा जाना । भारत – पाक युद्ध में देश के अनेक वीर काम आए ।

79. किनारा करना – अलग होना । रोज – रोज की इस बकझक से तंग आकर उसने घरवालों से किनारा कर लिया ।

80. कीचड़ उछालना- बदनामी करना । किसी के चरित्र और व्यवहार के विषय में जाने बिना उस पर कीचड़ उछालना मूर्खतापूर्ण कार्य है ।

81. कुएं में भाग पड़ना- सबकी बुद्धि नष्ट हो जाना । अगर कोई इक्का – दुक्का रिश्वत खोर हो , तो उसे समझाएँ भी । पर यहाँ तो सभी इस बुराई के शिकार हो रहे हैं । कुहेक ही भाग पड़ी हुई है ।

82. कुत्ते की मौत मरना – अपमानजनक मृत्यु । इतिहास इस बात का प्रमाण है कि हर चाटुकार कुत्ते की मौत मरता है ।

83. कोल्हू का बैल – दिन – रात मेहनत करने वाला । मजदूर कल – कारखानों और खेत खलिहानों में कोल्हू के बैल की तरह काम करते रहते हैं , फिर भी वे अभावों में ही पलते हैं ।

84. कोढ़ में खाज – विपत्ति पर विपत्ति । एक तो बाढ़ में उसकी फसल चौपट हो गई और फिर उसकी पत्नी गंभीर रूप से बीमार हो गई । यह तो कोढ़ में खाज वाली बात हो गई ।

[ख ]

85. खटाई में डालना- कोई निर्णय न करना । पुलिस ने रिश्वत लेकर मामले को खटाई में डाल दिया ।

86. खटका लगा रहना – शंकित रहना । लब से सेठ सुंदरलाल के घर में डकैती पड़ी है , घर की सुरक्षा को लेकर मन में खटका लगा रहता है ।

87. खाकडालना – बात को वहीं दबा देना । जो होना था , हो गया । भलाई तो अब सारी बातों पर खाक डालने में ही है ।

88. खाक छानना- मारे – मारे फिरना । कर्मयोग का ज्ञान पाने के लिए तुम देश – विदेश की खाक क्यों छान रहे हो , उसका तो सविस्तार वर्णन श्रीकृष्ण ने गीता में किया है । 89. खाक में मिलाना- बरबाद कर देना । अगर तूने इस बार मेरे विरुद्ध षड्यंत्र रचा , तो मैं तुम्हें खाक में मिलाकर ही दम लूँगा ।

90. खाला जी का घर- सरल कार्य । आई.ए.एस. की परीक्षा उत्तीर्ण करना खाला जी का घर नहीं है ।

91. ख्याली पुलावपकाना- कोरी कल्पना में डूबे रहना । सफलता पाने के लिए परिश्रम करने के बजाय ख्याली पुलाव पकाने वाले निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाते । 92. खिचड़ी पकाना – षड्यंत्र रचना ।पाकिस्तान भारत की शांतिप्रिय नीतियों के विरुद्ध समय -समय पर खिचड़ी पकता है

93.खन उबलना- बहुत क्रोध आना । जव भरीसभा में दुःशासन द्रौपदी का धस्व हरण करने लगा , तो भीन का सूत उवल पाहा ।

94.खून पसीना एक करना- बहुत परिश्रम करना । किसान खेतों में खून – पसीना एक करके फसल उगाते हैं । 

95.खून लगाकर शहीदों में नाम लिखवाना- बिना बलिदान यश पाने का मन करना । आजकल के बगुला भगत नेता देश सेवा तो करते नहीं , लेकिन खून लगाकर शहीदों में नाम लिखवाना चाहते हैं ।

[ग] 

96.गड़े मुर्दे उखाड़ना- भूली बातों को फिर याद करना । चौधरी साहव पिछली बातों को भूल जाओ , गड़े मुर्दे उखाड़ने से क्या लाभ ?

97. गजभर की छाती होना- उत्साहित होना । जब मैंने सुना कि मेरा छोटा भाई बी.ए. की परीक्षा में प्रथम आया है , तो मेरी छाती गज भर की हो गई ।

98. गले का ढोल – वेवसी में काम करना । आजकल व्याह शादी पर दहेज देना तो लोगों के लिए गले के ढोल के समान हो गया है ।

99 . गर्दन पर छुरी फेरना- अत्याचार करना । सेठ जी ! उधार के नाम पर साधनविहीन गरीबों को प्रत लूटी । यह तो गर्दन पर छुरी फेरने वाली ही बात है ।

100. गुदड़ी का लाल – छिपा हुआ गुणवान व्यक्ति । लाल बहादुर शास्त्री गुदड़ी के लाल थे ।

101. गाँठ पड़ना- मनमुटाव हो जाना । पहले वे दोनों गहरे मित्र थे , परंतु पैसे के लेन – देन को लेकर उन दोनों में गाँठ पड़ गई ।

102. गिरगिट की तरह रंग बदलना- बहुत जल्दी अपने विचार बदलना । आजकल के नेता गिरगिट की तरह रंग बदलते रहते हैं । जिस पार्टी को जीत देखते हैं , उसी में शामिल हो जाते हैं

103. गुल खिलाना- कोई शरारत करना :: उदंड छात्र प्रतिदिन कक्षा में नए – नए गुल खिलाते रहते हैं ।

104. गुड़िया का खेल- सरल काम । परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करना गुड़िया का खेल नहीं है ।

105. गुड़गोबर कर देना- बना बनाया काम बिगाड़ देना । कार्यक्रम बहुत अच्छी तरह से चल रहा था , अचानक वर्षा ने आकर सारा गुड़ गोबर कर दिया ।

106. गोबर गणेश – मुर्ख या भोला भाला व्यक्ति । रघूमल को सामान्य व्यवहार का भी ज्ञान नहीं है , वह तो पूरा गोवर गणेश है ।

107. गीदड़ भभकी- कोरी धाकी । मुझ पर तुम्हारी इस गीदड़ भभकी का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा ।

108. गाल बजाना- व्यर्थ की बातें करना । तुम गाल बजाने की बजाए यदि कुछ करके दिखाओ , तो जानें ।

 

109 , गागर में सागर भरना- थोड़े में अधिक कहना । कवि बिहारी के दोहे गागर में सागर हैं ।

[घ ]

110. घड़ों पानी पड़ना- अत्यंत लज्जित हो जाना । जब भरी सभा में उसकी बुराइयों की पोल खुली , तो उस पर घड़ों पानी पड़ गया ।

111. घर फूंक तमाशा देखना- अपनी हानि करके मनोरंजन करना । जुए वह हर बार हार जाता है फिर भी खेलने से बाज नहीं आ रहा।यह तो घर पॅक तमाशा देखने वालोबल

112 , घास खोदना- व्यर्थ समय गंवाना । जब तुम किसी परीक्षा में पास ही नहीं होते , तो फिर कक्षा में बैठकर क्या करते हो ? क्या घास खोदने हो ?

113 , घाट – घाट का पानी पीना– बहुत अनुभवी होना । तुम उसका क्या मुकाबला करोगे ? उसने तो घाट – घाट का पानी पी रखा है ।

114. घी के दिए जलाना – खुशियाँ मनाना । श्रीराम के वनवास से लौटने पर अयोध्यावासियों ने घी के दिए जलाए ।

115. घुटने टेकना- पराजय स्वीकार करना । चाहे कुछ भी हो जाए , पर चौधरी शक्ति सिंह कभी भी शत्रुओं के समक्ष घुटने नहीं टेकेगा ।

116. घोड़े बेचकर सोना- निश्चित होकर सोना । परीक्षा देने के पश्चात् विद्यार्थी घोड़े बेचकर सो जाते हैं ।

[च]

117 , चकमादेना – धोखा देना ठग लोगों को चकमा देकर उनकी संपत्ति लूट लेते हैं ।

118. चंपत हो जाना- भाग जाना । डाकू सारी संपत्ति लूटकर चंपत हो गए और पुलिस वाले सुरक्षा का ढोल पीटते ही रह गए ।

119. चाँदी का जूता- रिश्वत । आज के भ्रष्टाचारी युग में कुछ लोग अपना हर कार्य चाँदी के जूते के बल पर करा लेते हैं ।

120. चाँदी होना- काफी लाभ होना । जब बस्तुओं की गुणवत्ता की परख करने वाले ही रिश्वतखोर हों तो नकली माल बनाने वालों की चाँदी तो होगी ही ।

121. चार चाँद लगाना- शोभा बढ़ाना ।। बेटा ! तूने आई.ए.एस. की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करके अपने पिता की प्रतिष्ठा में चार चाँद लगा दिया है ।

122. चाँद पर थूकना – बड़ों की निंदा करना । नेताजी सुभाषचंद्र बोस के व्यक्तित्व और चरित्र पर दोष लगाना चाँद पर थूकने के समान है ।

123. चादरतानकर सोना – निश्चित हो जाना । पुत्री के हाथ पीले करके पिता चादर तानकर सो गया ।

124. चादर से बाहरपाँव पसारना – आमदनी से बढ़कर खर्च करना । चादर से बाहरपाँव पसारने वाले कई बार भयंकर विपत्ति में फंस जाते हैं ।

125. चार सौ वीस होना – धोखेबाज़ होना । राकेश की बातों पर कभी विश्वास मत करना।अरे । वह तो चार सौ बीस है ।

126. चारों खाने चित्त करना- हरा देना । गंगू देखने में बहुत ही दुबला – पतला था , पर कुश्ती में उसने महासिंह पहलवान को चारों खाने चित्त कर दिया ।

127. चिकना घड़ा – बेशर्म । तुम व्यंग्यात्मक वचनों से उसे सही मार्ग पर लाना चाहते हो , पर यह प्रयास व्यर्थ ही सिद्ध होगा ; क्योंकि वह तो चिकना घड़ा है ।

128. चिकनी – चुपड़ी बातें करना- खुशामद करना । जो चिकनी – चुपड़ी बातें करते हैं , उन्हें लोग सम्मान की नज़र से नहीं देखते ।

 

  1. चिराग लेकर ढूंढ़ना- बड़ी खोज करना । सीता जैसी सरल , साध्वी और पति परायणा पली तुम्हें चिराग लेकर दबने से भी नहीं मिलेगी ।
  2. चूड़ियां पहनना– कायर बनना । भारतीय वीरों ने पाकिस्तानी सैनिकों को ललकारते हुए कहा कि चीर हो तो युद्ध करो . अन्यथा घड़ियाँ पहनकर घरों में बैठ जाओ ।
  3. चुल्लू भर पानी में डूब मरना- अत्यंत लज्जाजनक वाता इतने संपन्न और प्रतिष्ठित परिवार के लड़के होकर भी चोरी करते हो ? तुम्हें तो चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए ।
  4. चौकड़ी भूल जाना- अहंकार दूर होना । सेना द्वारा चारों ओर घेर लिए जाने पर आतंकवादी अपनी चौकड़ी भूल गए ।
  5. चोली दामन का साथ- अटूट संबंध । परिश्रम और सफलता में चोली – दामन का संबंध है ।
  6. छक्के छुड़ाना – बुरी तरह हारना । कारगिल युद्ध में भारतीय वीरों ने पाकिस्तानी सैनिकों के छक्के छुड़ा दिए ।
  7. छठी का दूध याद आना- भारी संकट का सामना करना । अगर तुमने फिर शरारत को तो ऐसी पिटाई करूँगा कि छठी कादूध याद आ जाएगा ।
  8. छाती पर मूंग दलना – सामने रहकर बुरी तरह सताना । रग्घू ने अपनी पत्नी को घर से बाहर निकाल दिया , पर वही उसके उसके उसके पड़ोसी के घर में रहकर उसकी छाती पर मूंग दल रही है ।
  9. छाती पर साँप लोटना – ईया से जलना । अपने कट्टर विरोधी रामलाल के चुनाव में जीत जाने की खबर सुनकर गेरी छाती पर साँप लोटने लगा ।
  10. छींटे कसना – निंदा करना । रमा का चरित्र ही गिर गया है , इसीलिए तो गली – मुहल्ले के सभी लोग उस पर छींटे कसते रहते हैं ।
  11. छिपा रुस्तम – छिपा हुआ गुणवान व्यक्ति । देखने में साधारण – सा दिखने वाला रमेश दसवीं की परीक्षा में पूरे प्रांत में प्रथम आया है । अरे भाई ! वह तो छिपा रुस्तम निकला ।
  12. जली – कटी सुनाना- सच्ची किंतु कड़वी बात कहना । जब उसने मुझे रिश्वतखोर कहा तो मैंने उसे ऐसी जली – कटी सुनाई कि उसकी बोलती बंद हो गई । 
  13. जमीन पर पाँव न रखना- अभिमान करना । जबसे उसने लाटरी में 10 लाख रुपये जीते हैं , उसके पाँव जमीन पर नहीं पड़ रहे हैं । 
  14. जमीन – आसमान एक करना- बहुत प्रयल करना । मैंने अपने लापता पुत्र को ढूँढ़ने में जमीन – आसमान एक कर दिया पर , उसका कहीं पता नहीं चला ।
  15. आग में घी डालना – क्रोध को और अधिक भड़काना । तुम्हारी बातें तो आग में घी का काम कर रही हैं इसलिए चुप रहो नहीं तो झगड़ा बहुत बढ़ जाएगा । 
  16. जले पर नमक छिड़कना- दुखी दिल को और दुखाना । एक तो विधवा का बेटा मर गया और ऊपर से तुमने उसके स्वर्गवासी पति की दुर्घटना में हुई मृत्यु की याद दिलाकर उसके जले पर नमक छिड़क दिया ।
  17. जहर काउंट पीना – अपमान सहन करना ।अपने पुत्र के काले कारनामे सनकर पिता को जहर का पूंट पीना पड़ा ।
  18. जहर उगलना- कटु बात कहना । अगर पाकिस्तानी शासकों ने भारत के विरुद्ध जहर उगलना बंद न किया , तो इसके गंभीर परिणाम होंगे ।
  19. जान पर खेलना – प्राणों को संकट में डालना । शत्रुओं द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंग को जान पर खेलकर नष्ट करने के लिए बच्चूलाल को पुरस्कृत किया गया ।
  20. जान के लाले पड़ना – जान को खतरा होना । उग्रवादियों के लगातार हमलों के कारण जम्मू कश्मीर के सीमावर्ती गाँवों के नागरिकों के जान के लाले पड़े हुए है ।
  21. जान हथेली पर रखना- बलिदान के लिए तैयार रहना । सैनिक जान हथेली पर रखकर ही युद्ध में लड़ते हैं ।
  22. जी चुराना – बचने का यत्ल करना । साल भर तुम पढ़ने से जी चुराते रहे । अब फेल हो जाने पर रो क्यों रहे हो ?
  23. जीती मक्खी निगलना – अपने सामने अन्याय को सहना । इस गुंडे ने सरे आम सरपंचों को अपमान किया , पर उनके सामने जीती मक्खी निगलने के अलावा कोई चारा नहीं था .
  24. जूतियाँ चाटना – खुशामद करना । मोहनलाल को जूतियाँ चाटने में ही मज़ा आता है , स्वाभिमान की जिंदगी जीने में नहीं ।
  25. झंडागाड़ना- अधिकार करना । युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों ने अपने पराक्रम से कारगिल में झंडा गाड़ दिया ।
  26. : झांसा देना- धोखा देना । मुझे झाँसा मत दो । सच – सच बताओ कि तुमने मेरी पुस्तक किसे दे दी ?
  27. टस से मस न होना – जरा भी न हरना । दस राजाओं ने एक साथ मिलकर शिव का धनुष उठाना चाहा , लेकिन वह टस से मस भी न हुआ ।
  28. टाँग अड़ाना – बाधा डालना । कुछ लोगों की आदत ही होती है कि वे दूसरों के कार्य में अनावश्यक रूप से टाँग अड़ाते हैं ।
  29. टाय – टॉय फिस होना – सारी शान बिखर जाना । चौधरी साहब का गाँव में बड़ा दबदबा था पर डाकुओं ने जब उन्हें ललकारा , तो उनकी टाँय – टॉप फिस हो गई ।
  30. टेढ़ी खीर – कठिन कार्य । पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तानी सैनिकों से मुक्त कराना भारत के लिए टेढ़ी खीर है ।
  31. टेढ़ी उँगली से घी निकालना – चालाको से काम निकालना । तुम सीधे – सीधे गिरोह के सदस्यों के नाम और पता बता दो , नहीं तो मुझे टेढ़ी उँगली से घी निकालना भी आता है ।
  32. ठिकाने लगाना- मार डालना । मैंने छिप – छिपकर वार करने वाले दोनों शत्रुओं को आज सवेरे ही ठिकाने लगा दिया ।
  33. ठन – ठन गोपाल – कंगाल व्यक्ति । तुमचंद्र प्रकाश से अर्थिक सहायता की आशा मत करना , क्योंकि वह तो उन – उन गोपाल है ।
  34. ठकुर सोहाती- चापलूसी की बातें । मुझे तुम्हारी यह ठकुर सोहाती किसी को भी अच्छी नहीं लगती ।
  35. इंके की चोट- घोषणा के साथ । मैं डंके की चोट पर यह बात कह रहा हूँ कि इस बार हमारी टीम जीतेगी ।
  36. ढोल पीटना – प्रचार करना । आज हर पाटी गरीबी को हराने का ढोल पीट रही है , पर गरीबी है कि हटने का नाम ही नहीं ले रही ।
  37. तलवे चाटना , तलवे सहलाना – खुशामद करना । अरे ! सब जानते हैं कि तुमने तो यह पद तलवे चाटकर सहलाकर ही प्राप्त किया है ।
  38. तख्ता पलटना- विद्रोह द्वारा शासन बदल देना । मुगल काल में अनेक कट्टर मुस्लिम अपने ही भाई या पिता का तख्ता पलटकर शासक बने थे ।
  39. तारे गिनना- प्रतीक्षा करना । तुम वादा करके भी नहीं आए और मैंने तारे गिनने में ही रात काट दी ।
  40. तिल का ताड़ बनाना- छोटी बात को बढ़ाकर कहना । मौके पर जो कहा – सुनी हुई है , वही कहो । तिल का ताड़ बनाने की आवश्यकता नहीं है ।
  41. तीन – पाँच करना- टाल – मटोल करना । चुपचाप सीधे – सीधे मेरी जमीन मुझे लौटा दो , ज्यादा तीन – पाँच मत करो ।
  42. तिलांजलि देना- त्याग देना । इस पंचायत में सच्ची और सही बात पर कोई विश्वास नहीं करता ; इसलिए मैंने पंचायत को तिलांजलि दे रखी है
  43. . तूती बोलना- प्रभाव बढ़ना । इराक में कभी सद्दाम हुसैन की तूती बोलती थी ।
  44. थाली का बैंगन – अस्थिर विचारों वाला व्यक्ति । दलाल तो थाली के बैंगन होते हैं । जिससे लाभमिलने की उम्मीद होती है , उसी के पक्ष में बोलने लगते हैं ।
  45. थूककर चाटना- वचन से मुकर जाना । जो लोग थूककर चाटते हैं , उनकी बातों पर भला कौन विश्वास करेगा ।
  46. दम भरना – दावा करना । कल तक मित्रता का दम भरने वाले तुम आज अचानक बदल कैसे गए ?
  47. दमलेना- विश्राम करना । मैंने दिनभर खेत में खूब पसीना बहाया है , अब ज़रा दम तो लेने दो ।
  48. दंग रह जाना- आश्चर्यचकित होना । जादूगर के कारनामों को देखकर सभी दंग रह गए ।
  49. दाल गलना- इच्छा पूरी होना । मैंने झूठ बोलकर माँ से कुछ रुपये ऐंठने चाहे , पर मेरी दाल नहीं गली ।
  50. दाँतों दिले उँगली दबाना- आश्चर्व प्रकट करना । ‘ आज के वैज्ञानिक आविष्कारों को देखकर दाँतों तले उँगली दबानी पड़ती है ।
  51. दाँत पीसना – क्रोध करना । ” अंगद की व्यंग्योक्तियों को सुनकर रावण दाँत पीसने लगा ।
  52. दाँत खट्टे करना– बुरी तरह हराना । भारतीय वीरों ने सीमा पर एक नहीं , अपितु अनेक बार शत्रुओं के दाँत खट्टे किए हैं ।
  53. दाई से पेट छिपाना- जानकार से भेद छिपाना । दाई से पेट छिपाकर कहाँ जाओगे , मैं तुम्हारी नस – नस पहचानता हूँ ।
  54. दायाँ हाथ- सहायक । कर्मत और ईमानदार कर्मचारी अपने अफसर का दायाँ हाथ होते हैं ।
  55. दाल में करला- कुछ गड़बड़ । चोरी होने के दिन से ही घर का मौकर रामू गायव है । चाल में कुछ न कुछ काला अवश्य है ।
  56. दूध में माखी -अवांछित व्यक्ति  । अगर तुम इसी तरह विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहोगे , तो तुम्हें दूध की मक्खी की तरह पार्टी से निकाल दिया  जाएगा  ।
  57. दूध के दात न टूटना- अनुभवहीनता । तुम्हारे दूध के दाँत भी अभी नहीं टूटे । भला तुम मुझे क्या समझाओगे ।
  58. दो नावों पर पैर रखना- अस्थिर विचारों वाला । दो नावों पर पैर रखने वाला व्यक्ति अंत में डूबता है ।
  59. द्रौपदी का चीर – जिसका अंत न हो । भारत में बेरोजगारी की समस्या द्रौपदी का चीर हो रही है ।
  60. धज्जियां उड़ाना – टुकड़े – टुकड़े कर देना । योग्य संपादक अपने लेख में हर बुराई की धज्जियाँ उड़ा देता है ।
  61. धब्बा लगाना – कलंक लगाना । तुमसे तो बड़ी – बड़ी आशाएँ थीं , पर तुमने नशाखोरी करके अपने पिता की प्रतिष्ठा पर धब्बा लगा दिया ।
  62. धाक जमाना – प्रभाव डालना । स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण के द्वारा विदेशियों के हृदयों पर भारतीयता की धाक जमा ली थी ।
  63. धूप में बाल  सफेद करना- अनुभव की कमी । छात्र द्वारा झूठे बहाने बनाने पर अध्यापक ने कहा कि तुम मुझे गुमराह मत करो । मैंने यूँ ही धूप में बाल सफेद नई 1 . किए हैं ।
  64. धोखे की टट्टी – संदेह उत्पन्न करने वाला । सरकार की कुछ गोजनाएँ धोखे की टट्टी हैं । वे जनता को मोहित तो करती हैं , पर किसी प्रकार का लाभ नहीं पहुंचाती
  65. धोती ढीली होना- घबरा जाना । जब मैंने उसे पुलिस के हवाले करने की बात की , तो उसकी धोती ढीली हो गई ।
  66. नमक – मिर्च लगाना- बात को बढ़ा – चढ़ाकर कहना । कुछ लोगों की आदत ही हर बात को नमक – मिर्च लगाकर पेश करने की होती है ।
  67. नाक पर मक्खी न बैठने देना – अपने को बहुत बड़ा समझना । उससे किसी प्रकार की सहायता ही आशा करना व्यर्थ है क्योंकि वह तो नाक पर मक्खी भी बैठने नहीं देता ।
  68. नाक – भौंह सिकोड़ना- असंतोष प्रकट करना । माँ ने बेटे को चाय की जगह दूध पीने के लिए कहा तो वह नाक – भौंह सिकोड़ने लगा ।
  69. नाक में दम करना – बहुत तंग करना । विद्यालय में छुट्टी है इसीलिए आजकल इन शरारती बच्चों ने सबकी नाक में दम कर रखा है ।
  70. नाक का बाल – बहुत समीप रहने वाला व्यक्ति । आजकल बड़े साहब से बहुत डर लगता है , क्योंकि वे उच्च अधिकारियों की नाक के बाल बने हुए हैं ।
  71. नाक रगड़ना- गिड़गिड़ाना । चोर ने थानेदार के समक्ष खूब नाक रगड़ी , पर थानेदार ने उसे नहीं छोड़ा ।
  72. नाकों चने चबाना -बुरी तरह हराना , तंग करना ।

लोकोक्तियाँ 

लोकोक्ति की परिभाषा –

  लोक-अनुभव से निर्मित , लोक में प्रचलित उक्ति को लोकोक्ति कहते है। 

लोकोक्ति शब्द लोक और उक्ति से मिलकर बना है जिसका अर्थ है लोक में प्रचलित उक्ति,लोक प्रिसद्ध बात का कथन। समाज में लम्बे समय से जो कुछ सीखा ,  में बांध दिया वही वाक्य लोकोक्ति है।

लोकोक्ति  विशेषताएं –

  • लोकोक्ति भी मुहावरे की भांति अपने सामान्य अर्थ को छोड़ कर एक वशेष अर्थ प्रकट करती है
  •  अपने कथन की पुष्टि या उपदेश देने के लिए लोकोक्ति का प्रयोग किया जाता है
  • मुहावरा पूर्ण वाक्य न होकर वाक्यांश होता है तथा इसका प्रयोग वाक्य के बिच में होता है ,जबकि लोकोक्ति स्वतंत्र  रूप से एक उपवाक्य के रूप में एक अंत में प्रयुक्त की जाती है
  • लोकोक्ति का प्रयोग भाषा में सजीवता और विलक्षणता लेन के लिए किया जाता है। लोकोक्ति को कहावत भी कहते है।

लोकोक्तियाँ 

  1. अधजल गगरी छलकत जाय -कम योग्यता वाला व्यक्ति अधिक इतराता है -सुरेश हर वक़्त अपनी योग्यता की ढींगे मरता रहता है,पर उसकी वास्तविकता सब जानते है की अधजल गगरी छलकत जाय
  2. अपनी-अपनी ढपली अपना-अपना राग -सबका विचार अलग होना
  3. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता -अकेला आदमी कुछ नहीं कर सकता
  4. उल्टा चोर कोतवाल को डांटे -अपना दोष होने पर किसी निर्दोंष को धमकाना
  5. ऊँची दुकान फिंका पकवान -नाम बड़ा होने पर भी गुण काम होना
  6. खरबूजे को देख कर खरबूजा रंग बदलता है -संगती का प्रभाव पड़ने पर रंग ढंग बदल जाना
  7. चोर की दाढ़ी में तिनका -दोषी स्वयं डरता है
  8. जो गरजते है बरषते नहीं -डिंग मरने वाले काम नहीं करते
  9. डूबते को तिनके का सहारा -मुशीबत के समय थोड़ी सहायता  होती है
  10. थोथा चना बजे घना -छोटा या गुणहीन व्यक्ति बहुत इतराता है
  11. दूध का दूध पानी का पानी -ठीक न्याय
  12. नो नकद न तेरह उधार -उधर के अधिक धन से नकद का थोड़ा धन बेहतर है
  13. अन्धो में काना राजा – मूर्खों में थोड़ा पढ़ा लिखा भी विद्वान माना जाता है
  14. आम के आम गुठलियों के दाम -किसी काम या वस्तु क्र दो दाम होना
  15. ऊंट के मुँह में जीरा -किसी को उसकी जरुरत से कम  वस्तु देना
  16. एक अनार 100 बीमार – एक वस्तु के अनेक ग्राहक होना
  17. एक पंथ दो काज -एक ही उपाय से दो काम निकल जाना
  18. कन्हा राजा भोज कंहा गंगू तेली -आकाश पाताल का अंतर होना
  19. काला अक्षर भैंस बराबर -अनपढ होना
  20. खोदा पहाड़ निकली चुहिया -बहुत परिश्रम करने पर भी काम फल मिलना
  21. घर का भेदी लंका ढाये -आपस की फुट से घर तभाह  हो जाता है
  22. जाको राखे साइयाँ मार सके ना कोई -जिसका भगवान रक्षक है उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता
  23. जिसकी लाठी उसकी भैंस -शक्तिशाली की ही विजय होती है

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