hindi patra lekhan  {patra lekhan}

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पत्र एवं प्रारूप लेखन ( Letter and Draft Writing ) ।

भाषा के माध्यम से जो मानव – व्यवहार होता है , उसमें पत्र एक महत्त्वपूर्ण माध्यम है ।जब हम आमने – सामने नहीं होते तो पत्र के माध्यम से हमारी भौगोलिक दूरियों को पाटते हुए एक – दूसरे से रू – ब – रू हो जाते हैं और अपनी अभिव्यक्ति कर लेते हैं । पत्र के माध्यम से हम अपने व्यवहार में अधिक संयत , विवेकशील और सृजनशील हो सकते हैं इसलिए पत्रों के द्वारा होनेवाला संपर्क अनेक बार प्रत्यक्ष या फोन पर किए जानेवाले वार्तालाप से अधिक उपयुक्त और अर्थवान हो जाता है ।

कई बार हम जो बात प्रत्यक्ष रूप से नहीं कह सकते , उसे पत्र के माध्यम से व्यक्त कर सकते हैं । इसलिए पत्र दो व्यक्तियों की भौगोलिक दूरियों की विवशता का ही परिणाम नहीं है , यह अपने – आप में अभिव्यक्ति का एक अपरिहार्य विशिष्ट माध्यम भी है , इसीलिए एक ही स्थान पर रहनेवाले व्यक्तियों को भी patra lekhan की आवश्यकता पड़ सकती है । मानव इतिहास में पत्र – लेखन ने ऐसे करिश्मे किए हैं कि उससे इतिहास बदल गया है , मानव – चरित्र और घटना – क्रम बदल गया है तथा कई पत्र तो साहित्य के महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ भी बन गए हैं ।

इसलिए patra lekhan में मानव अभिव्यक्ति की अपार संभावनाएं हैं । व्यावसायिक एवं प्रशासनिक क्षेत्र में तो patra lekhan एक स्थायी प्रलेख ( डोक्यूमेंट ) का कार्य करता है , अतः patra lekhan की महत्ता और कौशल को जानना संपूर्ण मानव व्यवहार को अधिक अर्थवान और कलात्मक बनाना है । 

patra lekhan

पत्रों का वर्गीकरण 

opcharik patra

aupcharik patra

पत्रों को प्रमुख रूप से दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है- ( 1 ) व्यक्तिगत एवं सामाजिक तथा ( 2 ) कार्यालयीय – प्रशासनिक , व्यावसायिक आदि । 

( 1 ) व्यक्तिगत एवं सामाजिक पत्र 

व्यक्तिगत पत्र वे होते हैं , जो एक व्यक्ति की हैसियत से अपने आत्मीय जनों एवं निजी संबंध रखनेवालों को लिखे जाते हैं तथा जिनमें पत्र – लेखक अपनी वैयक्तिक भावनाओं को इस रूप में व्यक्त करता है कि वह पत्र – पाठक की वैयक्तिक संवेदनाओं का स्पर्श कर सके । अपने परिजनों और मित्रों आदि को इसी प्रकार के व्यक्तिगत पत्र लिखे जाते हैं । सामाजिक दायित्व एवं शिष्टाचार को निभाने के लिए एक सामाजिक की हैसियत से जो औपचारिक पत्र सामाजिकों के लिए लिखे जाते हैं तथा जिनमें बधाई , धन्यवाद , आमंत्रणा आदि की औपचारिक अभिव्यक्ति की जाती है , उन्हें सामाजिक पत्र कहा जाता है ।

( 2 ) कार्यालयीय पत्र

 कार्यालयीय पत्र वे होते हैं , जो किसी कार्यालय को कार्यालय के अधिकारी को ( वह कार्यालय चाहे सरकारी हो या गैर – सरकारी ) लिखे जाते हैं या किसी कार्यालय के द्वारा अन्य किसी कार्यालय अथवा व्यक्ति को कार्यालय संबंधी कार्यों के लिए लिखे जाते हैं ।

ऐसे कार्यालयीय पत्रों में समस्त प्रशासकीय एवं व्यावसायिक पत्रों , विशेष रूप से कार्यालय द्वारा जारी किए जानेवाले सामान्य पत्र ( Ordinary Letter ) , कार्यालय आदेश ( Ofice Or der ) , अर्ध – सरकारी पत्र ( Demi – Official Letter ) , अनुस्मारक पत्र / स्मरण पत्र ( Re minder ) , अधिसूचना ( Notification ) , परिपत्र ( Circular ) , प्रेस – विज्ञप्ति ( Press Com munique ) विज्ञप्ति ( Notice ) , विज्ञप्ति सूचना ( Tender Notice ) आदि को सम्मिलित किया जाता है ।

patra lekhan की आधारभूत बातें

patra lekhan मूलतः एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति के साथ किया जानेवाला व्यवहार है , अत : उत्कृष्ट व्यवहार के लिए अपेक्षित सद्भावना , स्पष्टता , विवेकशीलता , सार्थकता , समयबद्धता और सुरुचिसम्पन्नता के गुण patra lekhan में आवश्यक हैं । पत्र मानव – संबंधों को बेहतर बनानेवाला हो इसलिए

( i ) उसमें एक – दूसरे के प्रति समुचित स्नेह एवं सम्मान की अभिव्यक्ति होनी चाहिए ,

( ii ) अपने विचारों एवं भावों को व्यक्त करने में पूर्ण स्पष्टता , पारदर्शिता हो ताकि पत्र के लेखक और पाठक एक – दूसरे को समझ सकें और परस्पर निकट आ सकें ,

( iii ) पत्र में जो – कुछ लिखा जाए वह सुविचारित और सुव्यवस्थित रूप से लिखा जाए , न अनावश्यक विस्तार हो , न पुनरावृत्ति और संपूर्ण बात सिलसिलेवार तथा आवश्यकता पड़ने पर बिंदुवत् हो , कुछ भी न तो निरर्थक हो और न ही अनावश्यक ,

( iv ) पत्र का लेखन विशेष रूप से पत्रोत्तर विलंबित न हो , यथासमय हो ,

v ) पत्र में शब्द – चयन विचारों एवं भावों को प्रभावकारी ढंग से व्यक्त करनेवाला हो , शैली में प्रवाह हो ताकि पाठक सुगमता से उसे पढ़ता चला जाए तथा पत्र – लेखक के व्यक्तित्व की पहचान देता हो ।

पत्र का लेखन पढ़नेवाले के स्तर और रुचि के अनुकूल भी हो । पत्र का प्रारंभ पत्र – पाठक का स्वागत करनेवाला हो , समुचित स्नेह – सम्मान के साथ अभिवादन करनेवाला हो , पत्र के पाठक को पत्र एवं पत्र – लेखक के प्रति आकृष्ट करनेवाला हो , पत्र का समापन अपने कथन की प्रभावशीलता को निखारनेवाला हो , पत्र के पाठक पर वांछित एवं अनुकूल प्रभाव छोड़नेवाला हो । संक्षेप में , पत्र पत्र – लेखक का प्रतिनिधि होता है , अत : वह पत्र – लेखक के व्यक्तित्व को पूर्ण कलात्मकता के साथ प्रस्तुत करनेवाला होना चाहिए ।

 कार्यालयीय पत्र 

किसी सरकारी , गैर – सरकारी कार्यालयीय अथवा व्यावसायिक संस्थान को लिखे जानेवाले इस अथवा कार्यालयों एवं संस्थानों दवारा व्यक्ति अथवा संस्थानों को लिखे जानेवाले पत्रों कोटि में सम्मिलित किया जाता है । पूर्व में व्यावसायिक पत्रों के प्रारूप कार्यालयीय पत्रों के प्रारूप से भिन्न होते थे किंतु अब व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का संचालन भी सरकारी कार्यालयों की तरह व्यवस्थित ढंग से होता है , इसलिए अब व्यावसायिक पत्रों के प्रारूप भी सरकारी पत्रों के प्रारूप के अनुसार हो गए हैं । 

 कार्यालयीय एवं व्यावसायिक पत्रों में एक व्यक्ति और संस्थान ( सरकारी अथवा गैर सरकारी ) अथवा एक संस्थान और दूसरे संस्थान के बीच संपर्क स्थापित होता है , इसलिए इन पत्रों की संरचना संस्थान की प्रकृति को प्रकट करती है । संस्थान एक व्यक्ति नहीं होता , या एक संगठन होता है , अत : संस्थान को लिखे जानेवाले पत्रों में वैयक्तिक पत्रों के वैयक्तिक एवं आत्मीय स्पर्श सीमित ही होते हैं । उनमें व्यक्तिगत पत्रों जैसी स्वच्छंदता नहीं होती , वैयक्तिक भावों – प्रसन्नता , क्रोध , ज़िद , मान – मनुहार , पुचकार और डाँट – डपट की अभिव्यक्ति नहीं होती ।

कार्यालयीय एवं व्यावसायिक पत्रों में औपचारिक और शालीन भाषा – शैली होती है तथा तथ्यों , तों और नियमों के आधार पर विनय और विरोध तथा स्वीकार और नका होता है । एक संस्थान अनेक शाखाओं , विभागों , अनुभागों में बँटा हुआ होता है इसलिए पत्रों में पत्र – व्यवहार का विषय और संदर्भ अलग से वर्णित होता है । 

एक व्यक्ति यदि किसी कार्यालय या प्रतिष्ठान को पत्र लिखे तो उसे अपनी लेखन योग्यता , सद्भाव एवं सुस्पष्टता का परिचय देना चाहिए और दूसरी ओर एक कार्यालय द्वारा लिखे जानेवाले पत्र में कार्यालय की गरिमा और दृष्टि भी झलकनी चाहिए । 

कार्यालय को लिखे जानेवाले पत्र के घटक

 ( 1 ) पत्र शीर्ष ( लेटर हैड ) : पत्र शीर्ष में सरकारी कार्यालय अथवा व्यावसायिक प्रतिष्ठान का नाम एवं पूरा पता छपा होता है अथवा अंकित करना होता है । व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लैटा हैड में व्यवसाय का प्रकार अथवा विशिष्ट क्षेत्र भी अंकित होता है । टेलीफोन नंबर , टेलेक्स नंबर , ई – मेल , वेबसाइट आदि मुद्रित होते हैं । शाखा कार्यालय अथवा मुख्य कार्यालय का पता भी वांछनीय है । कंपनी पत्रों में कंपनी का चिह्न मोनोग्राम तथा सरकारी पत्रों में अशोक स्तंभ भी मुद्रित हो सकता है ।

आजकल व्यक्ति भी अपने नाम के लैटर पैड छपवा लेते हैं , जिनमें उनका नाम , पद , पता , फ़ोन , ई – मेल आदि का विवरण होता है । यदि मुद्रित लैटर पैड नहीं हो तो सबसे ऊपर दाहिनी ओर पत्र लिखनेवाले व्यक्ति का नाम एवं पता लिखा जाता है । 

( 2 ) दिनांक : दिनांक कागज के दाईं तरफ के छोर पर लिखा जाना चाहिए तथा दिन का अंक , महीने का पूरा नाम , उसके बाद अल्पविराम ( , ) एवं सन् की पूरी संख्या अंकित होनी चाहिए ; जैसे- 25 सितंबर , 20191 महीने का नाम लिखने के कारण इसके पहले ‘ दिनांक ‘ शब्द लिखना आवश्यक नहीं है क्योंकि महीने से सब – कुछ स्पष्ट हो जाता है ।

मुद्रित लेटर हैड में जहाँ तारीख लिखने का स्थान निर्दिष्ट है वहाँ तारीख अंकित होनी चाहिए । केवल अंकों में ( जैसे- 25.9.2019 ) लिखना उपयुक्त नहीं है , इससे कई बार भ्रम भी उत्पन्न हो सकता है । अत : महीने को अंकों के स्थान पर शब्दों में अंकित होना चाहिए ।

 ( 3 ) अंदर का पता : कार्यालयों द्वारा लिखे जानेवाले पत्रों में जिसको पत्र लिखा जा रहा है उस अधिकारी के पद का नाम , कार्यालय का नाम एवं उसका पूरा पता भी बाई और लिखा होना चाहिए । पारदर्शी खिड़कीवाले लिफ़ाफ़ों में तो यह पता डाक के लिए भी काम में लिया जाता है या फिर इसी पते के आधार पर डिस्पेच लिपिक लिफाफों पर पता लिखता है । उदाहरण

  •  सचिव 

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड , राजस्थान 

अजमेर ।

  •   निदेशक

 प्राथमिक शिक्षा , राजस्थान 

बीकानेर । 

( 4 ) विषय : कार्यालय को लिखे जानेवाले एवं कार्यालय द्वारा लिखे जानेवाले पत्रों में पत्र की सामग्री ( पत्र लिखने का उद्देश्य / मूल समस्या ) के शीर्षक के रूप में विषय का उल्लेख किया जाता है ताकि विषय को पढ़कर पत्र के उद्देश्य के बारे में तुरंत जानकारी मिल सके एवं कार्यालय में पत्र किस शाखा , विभाग , अनुभाग द्वारा उपयोग में लिया जाना है । उसका निर्णय पूरा पत्र पढ़े बिना ही हो सके ; जैसे विषय : सड़क की मरम्मत करवाने के संबंध में / नई सड़क बनवाने के संबंध में । 

( 5 ) संदर्भ : कार्यालयीय पत्रों में इस संबंध में आए पूर्व पत्रों तथा अन्य संबंधित घटना ( जैसे- टेलीफोन पर हुई बातचीत / समाचार – पत्र में प्रकाशित खबर आदि ) के संदर्भ का उल्लेख वांछनीय होता है ताकि पत्र को उसके संपूर्ण संदर्भ एवं परिप्रेक्ष्य में सुविधा से पढ़ा जा सके एवं उसे सही पत्रावली पर प्रस्तुत किया जा सके अथवा नत्थी किया जा सके ; जैसे आपका पत्र क्रमांक प . 2 ( 12 ) शिक्षा / 2019 / 2951 , दिनांक : 25 जनवरी , 2019 या आपसे 26 जनवरी , 2019 को हुई वार्ता या 27 जनवरी , 2019 को अमुक अखबार में प्रकाशित ख़बर आदि । कार्यालयीय पत्रों में विषय एवं संदर्भ की विशेष महत्ता है ।

 ( 6 ) संबोधन / अभिवादन : किसी प्रतिष्ठान अथवा उसके अधिकारी को संबोधन देने या उसका अभिवादन करने के लिए आदरसूचक शब्दों का प्रयोग किया जाता है , जैसे महोदय , मान्यवर / माननीय आदि । कार्यालयीय पत्र औपचारिक होते हैं इसलिए वरिष्ठ अधिकारी द्वारा कनिष्ठ अधिकारी को पत्र लिखने पर भी अभिवादन करने ( मान्यवर / महोदय लिखने ) का शिष्टाचार निभाया जाना चाहिए । 

( 7 ) पत्र का मध्य भाग : पत्र का मध्य भाग ही पत्र का मुख्य शरीर है , जिसमें पत्र का संदेश वर्णित होता है । पत्र के संदेश को सिलसिलेवार ढंग से , यदि आवश्यकता हो तो बिंदुवत , बिंदुओं के भी शीर्षक , उपशीर्षक के साथ , व्यक्त किया जाना चाहिए । संदेश में अनावश्यक विस्तार भी न हो तो संक्षिप्तता के चक्कर में अस्पष्टता या भ्रांति भी उत्पन्न न हो । कार्यालयीय पत्रों में स्पष्टता अवश्य रहनी चाहिए । भाषा में सहज प्रवाह , प्रसंगानुकूलता और प्रभावशीलता हो । 

पत्र के मध्य भाग को मुख्यत : चार भागों में लिखना चाहिए-

( i ) पत्र के प्रारंभ 2-3 वाक्यों में पत्र के विषय / समस्या का परिचय कराना चाहिए ; 

( ii ) इसके बाद पत्र के विषय का विस्तार करना चाहिए , जिसमें समस्या का वर्णन , उसके बारे में किए गए प्रयत्न , उसके संबंध में अपेक्षाएँ , सुझाव आदि बिंदुवत् लिखने चाहिए ; 

( iii ) अंत में पत्र का सारांश प्रस्तुत करते हुए निवेदन , प्रार्थना , अपेक्षा आदि को एक नए अनुच्छेद में , संक्षेप के साथ 1 2-3 वाक्यों में प्रस्तुत करना चाहिए । 

( 8 ) संलग्नित संदर्भ : पत्र की सामग्री की अपेक्षानुसार पत्र के साथ कुछ अन्य लिखित सामग्री जैसे किसी पूर्व पत्र की प्रति , बिल , बीजक , अन्य दस्तावेज़ मूल या प्रति के रूप में संलग्न किए जा सकते हैं । संलग्न  लिखकर उनका क्रमवार उल्लेख कर देना चाहिए ताकि पत्र प्राप्तकर्ता को संलग्नकों की जानकारी मिल सके और पत्र का पाठक आवश्यकतानुसार ‘ संलग्न ‘ का अध्ययन भी कर सके । 

( 9 ) शिष्टतासूचक अंत ( स्वनिर्देशन / अधोलेख भी कहते हैं ) : हस्ताक्षर करने से पूर्व पत्र – लेखक द्वारा पत्र – प्राप्तकर्ता के लिए शिष्टतासूचक शब्दों का प्रयोग किया जाता है । जैसे – भवदीय , भवन्निष्ठ , आपका आज्ञाकारी ( शिष्य / कर्मचारी ) , आपका विश्वासपात्र आदि ।

 ( 10 ) हस्ताक्षर : शिष्टतासूचक अंत के बाद पूरे हस्ताक्षर किए जाने चाहिए । हस्ताक्षर से नीचे कोष्ठक में पूरा नाम अंकित होना चाहिए तथा महिलाओं के नाम के पूर्व कुमारी श्रीमती / सुश्री लिख देना चाहिए । ( परीक्षा में अपना नाम न लिखकर कखग / चछज लिस देना चाहिए ।

 ( 11 ) प्रतिलिपि : यदि यह आवश्यक समझा जाए ( प्रत्येक पत्र में प्रतिलिपि देनी आवश्यक नहीं है किंतु परीक्षा में प्रतिलिपि देने का प्रारूप प्रस्तुत करना चाहिए ) कि इस पत्र के लिखे जाने की जानकारी अन्य किसी व्यक्ति या अधिकारी को भी मिलनी चाहिए तो सिर उस पत्र की प्रति उन संबंधित व्यक्तियों / अधिकारियों को दी जानी चाहिए । इसके लिए प्रतिलिपि 

: सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु ‘ लिखकर नीचे अधिकारियों के पद की वरिष्ठता के क्रम से संबंधित व्यक्ति / अधिकारी का नाम एवं पता लिखना चाहिए । प्रतिलिपि में अधिकारी के पद का नाम , कार्यालय का नाम और पता एक ही पंक्ति में लिख देना चाहिए । राज्यपाल , मंत्री आदि की प्रतिलिपि उनके सचिव / निजी सचिव के नाम से दी जा सकती है इसलिए इनके पदों के नाम से पहले सचिव / निजी सचिव लिखना चाहिए ।

 ( 12 ) हस्ताक्षर : प्रतिलिपि के विवरण के बाद नीचे , दाहिनी ओर पत्र – लेखक के हस्ताक्षर करके उसके नीचे कोष्ठक में नाम ( कखग ) लिख देना चाहिए । प्रतिलिपि में हस्ताक्षर से ऊपर भवदीय ‘ जैसे शब्द लिखने की ज़रूरत नहीं है । परीक्षा में गोपनीयता भंग न हो इसलिए कहीं भी स्वयं का वास्तविक नाम या कल्पित नाम भी नहीं लिखना चाहिए , कलग / चछज का प्रयोग करना चाहिए ।

 कार्यालयीय पत्र का प्रारूप 

  1. व्यक्ति द्वारा कार्यालय को पत्र ( आवेदन – पत्र )

 सरकारी एवं गैर – सरकारी कार्यालयों में अपनी किसी आवश्यकता की पूर्ति हेतु , विशेष रूप से रोज़गार प्राप्त करने के लिए , आवेदन – पत्र लिखने की आवश्यकता होती है । बहुत – सी संस्थाओं में तो आवेदन – पत्र का प्रारूप निर्धारित होता है किंतु यदि निर्धारित नहीं हो तो आवेदक को अपना ( 1 ) नाम ( 2 ) पता ( 3 ) आयु ( 4 ) शैक्षणिक योग्यता ( 5 ) अनुभव एवं ( 6 ) संबंधित कार्य के लिए अपनी विशेष योग्यता , अनुकूलता का उल्लेख करते हुए आवेदन पत्र सुलिखित अथवा टंकित रूप में प्रस्तुत करना चाहिए ।

 नमूना इस प्रकार है

 

 उदाहरण -1 . : सचिव , सरोकार संस्थान , जयपुर को सहायक आचार्य के पद पर नियुक्ति हेतु आवेदन – पत्र ।     

 

  कखग 

5 , क्षत्रज्ञ कॉलोनी

 जयपुर -302016 

30 जनवरी , 2019

 सेवा में , / प्रतिष्ठा में , 

सचिव

 सरोकार संस्थान 

शिप्रा पथ , मानसरोवर , जयपुर ।

 विषय : परिष्कार कॉलेज ऑफ़ ग्लोबल एक्सीलेंस में सहायक आचार्य ( इतिहास ) के पद पर नियुक्ति हेतु आवेदन 

। संदर्भ : राजस्थान पत्रिका के 25 जनवरी , 2019 के अंक में प्रकाशित आपकी विज्ञप्ति संख्या : 5/2019 

महोदय , 

राजस्थान पत्रिका के उक्त अंक में प्रकाशित विज्ञप्ति से ज्ञात है कि आपके महाविद्यालय में इतिहास विषय के सहायक आचार्य का पद रिक्त है । उक्त पद के लिए मेरे संबंध में अपेक्षित विवरण इस प्रकार है 

  1. नाम : कखग 
  2. पिता का नाम : तथद
  3. जन्म तिथि : 8 जुलाई , 1990
  4. जन्म स्थान : ग्राम चछज , तहसील : टठड , ज़िला : जयपुर , राजस्थान ।
  5. वर्तमान पता : 5 , क्षत्रज्ञ कॉलोनी , जयपुर -302016
  6. शैक्षणिक योग्यता : ( i ) एम.ए. इतिहास , राजस्थान विश्वविद्यालय , 2012,68 % अंक । ( ii ) NET – 2013 , ( iii ) Ph.D. – 2018 
  7. अनुभव : ( 1 ) तथद महाविद्यालय , जयपुर में इतिहास के सहायक आचार्य के पद पर एक वर्ष अध्यापन , ( ii ) पफब महाविद्यालय , जयपुर में सहायक आचार्य के पद पर पिछले दो वर्ष से कार्यरत । 
  8. विशेष योग्यता : ( i ) राजस्थान के इतिहास से संबंधित पाँच शोध – पत्र प्रकाशित । अध्यापन में मेरी विशेष रुचि है । मैं शिक्षक के रूप में निष्ठा एवं श्रमपूर्वक सेवा करना चाहता हूँ। 

आशा है कि आप मेरी योग्यताओं एवं अनुभव को ध्यान में रखते हुए मुझे उक्त पद पर सेवा करने का अवसर प्रदान करेंगे।

 सादर । 

संलग्न : शैक्षिक योग्यता एवं अनुभवों के प्रमाण – पत्रों की छायाप्रतियाँ ।

भवदीय

 ह . कखग

( नाम – कखग )

 ( आवेदन – पत्र में किसी अन्य को आवेदन – पत्र प्रतिलिपि भेजने की आवश्यकता नहीं रहती है । ) 

patra lekhan

अनौपचारिक पत्र | अनौपचारिक पत्र प्रारूप, नमूने और अनौपचारिक पत्र

लिखें?

Informal Letter | Informal Letter Format, Samples and How To Write an Informal Letter?

अनौपचारिक पत्र लेखन:Informal Letter

एक अनौपचारिक पत्र (Informal Letter) एक गैर-आधिकारिक पत्र है जिसका उपयोग हम आमतौर पर अपने दोस्तों, परिवार या रिश्तेदारों को लिखने के लिए करते हैं। ये पत्र व्यक्तिगत पत्र हैं जिनका उपयोग आधिकारिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाता है। ऐसे कई कारण हो सकते हैं जिनकी वजह से हम अपने परिवार और दोस्तों को ये पत्र लिखते हैं। उदाहरण के लिए, यदि हम उन्हें स्कूल या कॉलेज में अपनी उपलब्धि के बारे में सूचित करना चाहते हैं, तो हम उन्हें अपनी निजी खबर फैलाने के लिए एक पत्र लिखते हैं।

चूंकि, पत्र अनौपचारिक है इसलिए अभिवादन आमतौर पर ‘प्रिय’ द्वारा दिया जाता है, जैसे प्रिय (मित्र का नाम/चाचा या चाची का नाम) या प्रिय पिता/माता इत्यादि। औपचारिक पत्रों के विपरीत, आपको उल्लेख करने की आवश्यकता नहीं है अनौपचारिक पत्रों के लिए विषय पंक्ति। लेकिन पत्र भेजने वाले और प्राप्त करने वालों के पते का उल्लेख आवश्यक रूप से किया जाना चाहिए

अनौपचारिक पत्र उदाहरण Informal Letter example 

अनौपचारिक पत्र (Informal Letter) लिखने के लिए कई विषय हो सकते हैं। आइए यहां देखें उनमें से कुछ:

  1. एक समारोह के लिए एक दोस्त को आमंत्रित करना
  2.  जन्मदिन के लिए
  3. किसी मित्र को यात्रा या छुट्टी पर बुलाना
  4. अपने द्वारा की गई गलतियों के लिए क्षमा मांगना या किसी से क्षमा मांगना
  5. किसी मित्र को उसकी सफलता या उपलब्धि के लिए बधाई देना
  6. सिर्फ एक व्यक्ति की भलाई के लिए पूछने के लिए लिखना
  7. शादी का निमंत्रण
  8. किसी से मदद मांगना
  9. परिवार या दोस्तों में किसी के निधन की सूचना देना

ऊपर दिए गए कारणों के अलावा और भी कई कारण हो सकते हैं जिनके लिए हम एक अनौपचारिक पत्र लिख सकते हैं।

अनौपचारिक (Informal Letter) पत्र का प्रारूप

अनौपचारिक पत्र कैसे लिखें? how to write Informal Letter

किसी मित्र को अनौपचारिक पत्र के प्रारूप में निम्नलिखित बातें शामिल होनी चाहिए:

प्रेषक का पता
पत्र लिखने की तिथि
रिसीवर का पता
अभिवादन/अभिवादन
पत्र का मुख्य भाग
निष्कर्ष
प्रेषक के हस्ताक्षर

पत्र को अनौपचारिक तरीके से लिखने के लिए एक प्रारूप नीचे दिखाया गया है

[प्रेषक का पता]
दिनांक:

प्रिय (व्यक्ति का नाम)

पत्र का मुख्य भाग:

अनुच्छेद १: व्यक्ति की भलाई के लिए पूछें

पैराग्राफ 2: पत्र लिखने का मुख्य कारण

पैराग्राफ 3: निष्कर्ष और पत्र का अंत

आपका प्यार से,

प्रेषक का नाम

अनौपचारिक पत्र लेखन – एक मित्र को अनौपचारिक पत्र

किसी मित्र को पत्र आमतौर पर प्रकृति में अनौपचारिक होता है। हम यह पत्र किसी मित्र को किसी बात की सूचना देने या उसे किसी अवसर पर आमंत्रित करने के लिए लिखते हैं। कभी-कभी हम कुछ गलती होने पर सॉरी पूछने के लिए भी लिखते हैं। कभी-कभी हम उन्हें सिर्फ उनकी भलाई जानने के लिए लिखते हैं। आइए हम यहां एक अनौपचारिक पत्र परिभाषा नमूना देखें।

बर्थडे पार्टी का निमंत्रण पत्र

32 ग्राम पंचायत कोटड़ी

श्रीमाधोपुर (सीकर)

राजस्थान

दिनांक: 30 अगस्त  2021

प्रिय मित्र दीपू

आप कैसे हैं ? आपके परिवार के सदस्य कैसे हैं? वहां मौसम कैसा है ? आशा है आप अच्छे होंगे । मैं यहां भी ठीक हूं,

मैं आपको अपने जन्मदिन की पार्टी के लिए आमंत्रित करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं जो 30 जून 2020 को मनाई जाएगी। पार्टी मेरे लोनावाला के फार्महाउस में आयोजित की जाएगी। इसकी शुरुआत शाम छह बजे से होगी। आयोजन स्थल का पूरा पता है ) . यदि आपको पते के बारे में कोई भ्रम है तो आप सीधे मेरे फोन नंबर पर मुझे कॉल कर सकते हैं हमें एक दूसरे को देखे हुए काफी समय हो गया है। और अगर आप मेरे जन्मदिन की पार्टी में शामिल हो सकते हैं तो मुझे वास्तव में बहुत खुशी होगी।

आपसे जल्द ही मिलने का इंतजार है,

तुम्हारा प्यारा मित्र

मुकुंद शेखावत

सफलता पर बधाई देने के लिए मित्र को अनौपचारिक पत्र Informal Letter

आइए हम एक मित्र को कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए बधाई देने के लिए एक और पत्र लिखें।

आपकी सफलता के लिए बधाई

32 ग्राम पंचायत कोटड़ी

श्रीमाधोपुर (सीकर)

राजस्थान

दिनांक: 30 अगस्त  2021

प्रिय मित्र दीपू

कैसे हो? आपके परिवार के सदस्य कैसे हैं? वहां मौसम कैसा है? आशा है आप अच्छे होंगे। मैं भी यहाँ ठीक हूँ। मैंने आपके कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने की खबर सुनी। मुझे आप पर बहुत खुशी और गर्व महसूस हो रहा है, इसके लिए मैं आपको बधाई देना चाहता हूं।

मुझे पता है कि आपने इसके लिए बहुत मेहनत की होगी और आखिरकार आपने वो हासिल कर लिया जो आप चाहते थे। टैम को उम्मीद है कि आप भविष्य में सभी सफलता हासिल करेंगे। इसे जारी रखो। साथ ही आपसे व्यक्तिगत रूप से मिलने और बधाई देने का प्रयास करेंगे। अगर हम कभी मिलेंगे तो आपकी सफलता का जश्न जरूर मनाएंगे तब तक अपना और अपने परिवार का ख्याल रखें। ख्याल रखना।

तुम्हारा प्रिय मित्र

मुकुंद शेखावत

एक मित्र को नमूना अनौपचारिक पत्र Informal Letter

एक मित्र को पत्र

32 ग्राम पंचायत कोटड़ी 

श्रीमाधोपुर (सीकर)

राजस्थान 

 दिनांक: 30 अगस्त  2021 

प्रिय मित्र दीपू

आप कैसे हैं? आपके परिवार के सदस्य कैसे हैं? वहां मौसम कैसा है? आशा है कि आप अच्छा कर रहे हैं मैं भी यहाँ ठीक हूँ। मेरा तबादला एक बोर्डिंग स्कूल में हो गया है और मैं यहाँ बहुत खुश हूँ। यहां मेरे बैचमेट और शिक्षक बहुत अच्छे और मददगार हैं वे मुझे यहां घर जैसा महसूस कराते हैं। कक्षाएं बहुत अच्छी तरह से बनाए रखी गई हैं और विशाल हैं। कैंपस के अंदर एक बड़ा पुस्तकालय है, जहां मैं 1 घंटे किताबें पढ़ने में बिताता हूं।

यहां की प्रयोगशालाएं भी बहुत अच्छी तरह से सुसज्जित हैं, इस स्कूल में एक स्पोर्ट्स हॉल भी है, जहां हम स्विमिंग पूल सहित खेल संबंधी सभी सुविधाएं प्राप्त कर सकते हैं। मुझे बहुत खुशी होगी अगर आप मेरे स्कूल आ सकते हैं ताकि आप माहौल में एक नज़र डाल सकें। मुझे उम्मीद है कि आपको भी यह यहाँ पसंद आएगा हालाँकि मैंने यहाँ कुछ दोस्त बनाए हैं लेकिन फिर भी आपको बहुत याद करता हूँ जल्द ही आपसे मिलने का इंतज़ार कर रहा हूँ। इसके बाद अपना ख्याल रखें। 

प्यार से।

मुकुंद शेखावत 

पिता को अनौपचारिक पत्र Informal Letter

हम अपने माता-पिता या तो पिता या माता या उन दोनों को अपने प्यार का इजहार करते हुए और उनकी भलाई के लिए पूछने के लिए अनौपचारिक पत्र उदाहरण भी लिख सकते हैं। कभी-कभी हम जीवन में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपने माता-पिता से बहुत दूर रहते हैं। लेकिन हमें उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना कभी नहीं भूलना चाहिए और ऐसे सहायक माता-पिता होने के लिए हमेशा उनका आभारी रहना चाहिए।

अपने माता-पिता की भलाई के लिए उन्हें पत्र लिखने के लिए कहने के अलावा और भी कई कारण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आपको अपनी नौकरी में पदोन्नति मिली है, या आप कक्षा में प्रथम स्थान पर हैं, या उन्हें अपने कॉलेज के वार्षिक समारोह के लिए आमंत्रित किया है, आदि।

आइए यहां कुछ नमूना पत्र देखें।

पिता को पत्र

32 ग्राम पंचायत कोटड़ी 

श्रीमाधोपुर (सीकर)

राजस्थान 

 दिनांक: 30 अगस्त  2021 

प्रिय पिताजी

(या आप अपने पिता को कैसे संबोधित करते हैं) आप कैसे हैं? आपके परिवार के सदस्य कैसे हैं? वहां मौसम कैसा है? आशा है कि आप अच्छा कर रहे होंगे मैं भी यहाँ ठीक हूँ। मैं आपको यह सूचित करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं कि मैंने अपने विश्वविद्यालय में पिछले सेमेस्टर की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

मुझे यकीन है कि यह खबर सुनकर आपको खुशी होगी। कृपया इसके लिए माँ को भी सूचित करें। हमें एक-दूसरे को देखे हुए काफी समय हो गया है। मैं आने वाली छुट्टियों में घर आने की योजना बना रहा हूं। हम इस उपलब्धि का जश्न एक साथ मनाएंगे। जल्द ही आपसे मिलने का इंतजार है। तब तक ख्याल रखना।

 आपका प्रिय पुत्र 

पिता को वार्षिक समारोह में आमंत्रित करने के लिए पत्र

वार्षिक समारोह के लिए उन्हें आमंत्रित करने के लिए पिता को पत्र

32 ग्राम पंचायत कोटड़ी 

श्रीमाधोपुर (सीकर)

राजस्थान 

 दिनांक: 30 अगस्त  2021 

प्रिय पिताजी (या आप अपने पिता को कैसे संबोधित करते हैं) आप कैसे हैं? मा केसी है? वहां मौसम कैसा है? आशा है कि आप अच्छा कर रहे हैं मैं भी यहाँ अच्छा कर रहा हूँ। मैं यह पत्र आपको यह सूचित करने के लिए लिख रहा हूं कि मेरे कॉलेज में अगले महीने एक वार्षिक समारोह आयोजित होने जा रहा है।

मैं समारोह का मेजबान रहूंगा और वहां एंकरिंग करूंगा। अगर आप और मां इस समारोह में शामिल होने आएंगे तो मुझे बहुत खुशी होगी। वार्षिक समारोह की तिथि ३ जून २०२० है और स्थल हमारा कॉलेज सभागार होगा कृपया आने का प्रयास करें क्योंकि यह लंबे समय से आप लोगों को देखकर मैं वास्तव में अभिभूत महसूस करूंगा यदि मैं आपके सामने प्रदर्शन कर सकता हूं और आपको वहां पर गर्व कर सकता हूं।

संभवत: वापस लौटते समय मैं भी आपके साथ शामिल हो जाऊंगा, जल्द ही आपसे मिलने की उम्मीद में तब तक ध्यान रखना जब तक ध्यान रखना।

ढेर सारा प्यार,

मुकुंद शेखावत 

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अनौपचारिक पत्र (Informal Letter) पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1।
एक अनौपचारिक पत्र क्या है?

उत्तर:
एक अनौपचारिक पत्र (Informal Letter) एक गैर-आधिकारिक पत्र है जिसका उपयोग हम आमतौर पर अपने दोस्तों, परिवार या रिश्तेदारों को लिखने के लिए करते हैं। ये पत्र व्यक्तिगत पत्र हैं जिनका उपयोग आधिकारिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाता है। ऐसे कई कारण हो सकते हैं जिनकी वजह से हम अपने परिवार और दोस्तों को ये पत्र लिखते हैं।

प्रश्न 2।
अनौपचारिक पत्र (Informal Letter) के विषय क्या हैं?

उत्तर:

एक समारोह के लिए एक दोस्त को आमंत्रित करना कहें जन्मदिन के लिए
किसी मित्र को यात्रा या छुट्टी पर बुलाना
अपने द्वारा की गई गलतियों के लिए क्षमा मांगना या किसी से क्षमा मांगना
किसी मित्र को उसकी सफलता या उपलब्धि के लिए बधाई देना
सिर्फ एक व्यक्ति की भलाई के लिए पूछने के लिए लिख रहा हूँ
शादी का निमंत्रण
किसी से मदद मांगना
परिवार या दोस्तों में किसी के निधन की सूचना देना
प्रश्न 3।
अनौपचारिक पत्र कैसे लिखें?

उत्तर:
एक अनौपचारिक पत्र का प्रारूप है:

अपने पते से शुरू करें

वर्तमान तिथि का उल्लेख करें

नमस्कार/अभिवादन जैसे प्रिय (व्यक्ति का नाम)

शरीर के पहले पैराग्राफ में व्यक्ति की भलाई के लिए पूछें।

अगले पैराग्राफ में पत्र लिखने का कारण लिखें

फिर निष्कर्ष लिखें

अपने नाम के साथ पत्र को बंद करें जैसे:

आप प्यार से
प्यार से
बहुत सारा प्यार
प्रश्न 4.
अनौपचारिक पत्र कैसे शुरू करें?

उत्तर:
आप पहले व्यक्ति को नमस्ते/अरे/नमस्ते/प्रिय (व्यक्ति का नाम) जैसे अभिवादन से पत्र शुरू कर सकते हैं। फिर पूछें कि क्या वह अच्छा कर रहा है।

प्रश्न 5.
पत्र कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर:
अक्षर तीन प्रकार के होते हैं।

औपचारिक पत्र
अनौपचारिक पत्र
अर्ध औपचारिक पत्र

आशा करता हूँ आपको मेरे द्वारा लिखा गया Informal Letter hindi  में   पसंद आया होगा और आपको इस से कुछ नया सिखने को मिला होगा 

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